हल्द्वानी। रामलीला मैदान में चल रहे पुस्तक मेले में मंगलवार को बुजुर्ग पाठकों की भी भीड़ दिखी। कोई उत्तराखंड का इतिहास छान रहा था तो कोई धार्मिक, पौराणिक कथाएं। कुछ ने तो नाती-पोतों को लिए विभिन्न ज्ञानवर्धक किताबों का पुलिंदा ही खरीद डाला। 30 सीरीज की बच्चों की पुस्तक गेरोनिमा स्टिल्टन की सारी प्रतियां ही बिक गईं। इन्हें दीक्षांत स्कूल के निदेशक समित टिक्कू ने खरीदा।
58 साल की तुलसी बिष्ट ने कहा कि शिव महापुराण और नाती-पोते के लिए भी ज्ञानवर्धक पुस्तकें खरीदीं। ज्योलीकोट से आए 62 साल के रमेश चंद्र गुरुरानी ने बताया कि छात्रों के लिए काफी बेहतरीन पुस्तकें मिली हैं। हल्द्वानी के 50 वर्षीय मो.आरिफ ने गालिब, जिगर मुरादाबादी, सुदर्शन फकीर की किताबें खरीदीं। पंगराड़ी, गहना के 66 वर्षीय खीमानंद बहुगुणा ने कहा कि उत्तराखंड का इतिहास और कुमाऊंनी साहित्य खरीदा है।
पुस्तकों की दुनिया से अंतरिक्ष की उड़ान
पुस्तक मेले के स्टाल नंबर 23 में एजूकेशनल एंड साइंस्टिफिक एड्स के उपकरण हैं। संचालक साहिल मलिक बताते हैं कि एस्ट्रोनॉमिकल टेलीस्कोप, माइक्रोस्कोप, लैंस, एचडी क्वालिटी की दूरबीन, समय सूचक यंत्र सहित अन्य वस्तुओं की खरीदारी काफी हो रही है।
गजल और हास्य, व्यंग्य की बयार
हल्द्वानी। शाम को हुए काव्य गोष्ठी में दिल्ली, मुंबई से पहुंचे कवियों ने हास्य की फुहार छोड़ी तो गजल ने समा बांध दिया। अध्यक्षता कर रहे दिल्ली के कवि रणविजय राव ने ‘जब छोटे थे तुम्हीं नहीं चलना सीख रहे थे...’। नवीन विश्वकर्मा, सुप्रिया कपकोटी, मुंबई से पहुंची सुमिता प्रवीण केशरवानी, सौम्या दुआ, गणेश भट्ट, अंबिकेश त्रिपाठी ने भी ने काव्य पाठ किया।