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भारतीय चिकित्सा पद्धति का स्वरूप बदलने का विरोध

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हल्द्वानी। नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (नीमा) ने भारतीय चिकित्सा पद्धति के वर्तमान स्वरूप के परिवर्तन का आयुष चिकित्सकों ने शुक्रवार को विरोध, प्रदर्शन किया। नीमा ने छह सूत्रीय मांगें न माने जाने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी है, साथ ही प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपा।
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नीमा के पदाधिकारियों का कहना है कि केंद्र सरकार ने नीति आयोग की ओर से आईएमसीसी एक्ट 1970 को समाप्त करके एनसीआईएसएम 1917 का प्रारूप रखा है। इससे सेंट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसिन (सीसीआईएम) अब नेशनल कमीशन ऑफ इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन (एनसीआईएसएम) में बदल जाएगा। केंद्र सरकार की हठधर्मिता और अलोकतांत्रिक रवैये के विरुद्ध आवाज उठाई जाएगी। आंदोलन के प्रथम चरण में देश के जिला मुख्यालयों में प्रधानमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री-आयुष मंत्री और नीति आयोग के उपाध्यक्ष को ज्ञापन भेजा गया है। एक माह के भीतर छह सूत्रीय मांगों पर निर्णय नहीं हुआ तो छह नवंबर को जंतर-मंतर पर देश के लाखों चिकित्सक धरना-प्रदर्शन करेंगे। प्रदर्शन करने वालों ने डॉ. विनय खुल्लर, डॉ. सीएस कांडपाल, डॉ. अतुल राजपाल, डॉ. आदित्य लोहनी, डॉ. बीबी जोशी, डॉ. वसीम अहमद, डॉ. गौरव बिष्ट, डॉ. विनोद जोशी, डॉ. एनएच खान, डॉ. मोबिन, डॉ. मुस्तकीम, डॉ. आमिर आदि थे।

ये हैं मांगें

परिषद को आयोग में परिवर्तित करते समय आईएसएम की परिभाषा, स्वरूप और क्षेत्र को परिवर्तित न किया जाए। इसे समन्वित चिकित्सा पद्धति घोषित किया जाए।

अधिनियम में इंटीग्रेटेड प्रैक्टिस के आधार पर संबंधी नियम उपनियम और खंड को पूर्णत स्पष्ट एवं वैधानिक बनाया जाए।

इस समन्वित चिकित्सा पद्धति को राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति घोषित किया जाए और देशभर में प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को भारतीय चिकित्सा पद्धति के चिकित्सकों के लिए आरक्षित किया जाए।
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आईएसएम के शिक्षण संस्थानों की आधारभूत संरचना, सुदृढ़, सुव्यवस्थित, आधुनिक बनाई जाए।

हमारी पद्धति, हमारे स्नातक और स्नातकोत्तर चिकित्सकों के अधिकार, सुविधाएं, वेतन एवं हर राष्ट्रीय नीति निर्धारण में हमारे संघ को उचित प्रतिनिधित्व, सम्मान और विचारों को समावेशित किया जाए।

भारतीय चिकित्सा पद्धति में योग, प्राकृतिक चिकित्सा और सेवा रिग्या आदि एकांगी, आधी-अधूरी और अव्यवहारिक चिकित्सा पद्धतियों को सम्मलित करके इसे आयुर्वेद-यूनानी के समन्वित संपूर्ण और सक्षम चिकित्सा और चिकित्सकों के साथ समूहबद्ध करके भारतीय चिकित्सा पद्धति को समाप्त करने का कुचक्र का विरोध।
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