रामनगर (नैनीताल)। अब तस्कर भी हाईटेक हो गए और वन्यजीवों की तस्करी ऑनलाइन कर रहे हैं। ऑनलाइन तस्करी पर अंकुश और साइबर क्राइम रोकने के लिए कॉर्बेट नेशनल पार्क के झिरना रेंज में वन कर्मियों की दो दिवसीय कार्यशाला शुरू हो गई है।
दिल्ली से आए ट्रैफिक इंडिया के हेड साकेत बडोला ने बताया कि तस्कर दुर्लभ वन्यजीवों और उनके अंगों की गैरकानूनी खरीद फरोख्त के लिए फेसबुक, वाट्सएप, स्नैपडील, अमेजॉन, क्विकर, ओएलएक्स, ई-बे और यूट्यूब जैसी वेबसाइटों का इस्तेमाल कर रहे हैं। पूरे भारत में वन्य जीवों के बढ़ते ऑनलाइन अवैध कारोबार को रोकने के लिए साइबर क्राइम को लेकर कार्यशाला आयोजित की जा रही है।
पहले चरण में कॉर्बेट नेशनल पार्क में दो दिवसीय कार्यशाला हो रही है। इसके बाद असोम में काजीरंगा नेशनल पार्क, राजस्थान में सरिस्का नेशनल पार्क, कर्नाटक में डांडेली और नागाहोले नेशनल पार्क एवं उड़ीसा में सतकोशिया नेशनल पार्क में कार्यशाला आयोजित की जाएगी।
इसके बाद इच्छुक वन अधिकारियों और कर्मियों को इंदौर में होने वाली पांच दिनी कार्यशाला में भेजा जाएगा। डब्ल्यूडब्ल्यूडब्लयूएफ, ट्रैफिक इंडिया, पीटीएस इंदौर, एनटीसीए की ओर से कार्यशाला को संयुक्त रूप से आयोजित की जा रही है।
कार्यशाला में मध्य प्रदेश के एडीजी वरुण कपूर और उनकी टीम, सीसीएफ वाइल्ड लाइफ सुरेंद्र मेहरा, सीटीआर के निदेशक राहुल, उपनिदेशक चंद्रशेखर जोशी, वार्डन शिवराज चंद सहित सभी रेंजर, फारेस्ट गार्ड मौजूद रहे।
इनकी बिक्री हो रही है ऑनलाइन
ट्रैफिक इंडिया के हेड साकेत बडोला ने बताया कि देखा गया है कि कछुओं, बाघ की खाल, सांप, दोमुंहा सांप की सबसे ज्यादा ऑनलाइन तस्करी होती है। दुर्लभ प्रजाति के कछुओं के अलावा, धनप्राप्ति, वशीकरण, विल पॉवर आदि के नाम पर वन्यप्राणियों के अंगों की ऑनलाइन बिक्री हो रही है।
सोशल मीडिया लैब से रखी जाएगी नजर
दिल्ली स्थित सोशल मीडिया लैब के जरिए ऑनलाइन हो रही तस्करों पर नजर रखी जाएगी। सोशल मीडिया लैब से ऑनलाइन खरीदने और बेचने पर वालों को ट्रैक किया जाएगा और गिरफ्तारी भी की जाएगी। साकेत बडोला ने बताया कि इसके अलावा कई ऐसे एप्स भी आ गए हैं, जिनके जरिए आसानी से तस्करों को पकड़ा जा सकता है। इन सभी की जानकारी कार्यशाला में वनकर्मियों को दी जा रही है।
वन्यजीवों और वन्यजीव अंगों की ऑनलाइन हो रही तस्करी
- तस्करी को रोकने को लेकर झिरना रेंज में शुरू हुई दो दिवसीय कार्यशाला