हल्द्वानी। उच्चशिक्षा निदेशालय के तबादलों में छूट के तीनों प्रस्तावों को शासन से हरी झंडी न मिलने के कारण डिग्री कॉलेजों के प्राध्यापकों और कर्मचारियों के तबादले अधर में फंस गए हैं। तबादले कब तक होंगे, निदेशक से लेकर शासन तक कुछ कहने को तैयार नहीं हैं। इससे दुर्गम में वर्षों से तैनात प्राध्यापकों में मायूसी छाई है।
उच्च शिक्षा निदेशालय ने कर्मचारियों के 10 प्रतिशत से अधिक तबादले करने, तबादलों की न्यूनतम आयु 60 से बढ़ाकर 63 वर्ष करने और प्राचार्यों को स्थानांतरण एक्ट के दायरे से बाहर रखने की अनुमति मांगी थी। निदेशालय के इस प्रस्ताव पर शासन स्तर पर गठित उच्चस्तरीय समिति ने अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि दस प्रतिशत से अधिक तबादलों की छूट देने का कोई प्रावधान नहीं है। अन्य दोनों प्रस्तावाें पर भी स्वीकृति देने के बजाय औचित्यपूर्ण प्रस्ताव फिर से मांगा गया है। शासन की मुहर न लगने से अभी तक कोई भी स्थानांतरण आदेश जारी नहीं हो सका है। निदेशालय स्तर से तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के जो तबादले किए गए थे वे भी आपत्तियां उठने के कारण निरस्त करने पड़े। स्थानांतरण प्रस्ताव तैयार करने के दौरान निदेशालय के अधिकारी एवं कर्मचारी प्रोफेसर पद नाम की रेवड़ी बांटने में लगे रहे। उच्चशिक्षा निदेशालय द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों में बार बार शासन स्तर पर खामियां पाए जाने से प्रस्ताव को तीन बार लौटाया जा चुका है।
जहां डिग्री कॉलेज में एक भी नियमित प्राध्यापक और कर्मचारी नहीं हैं ऐसे कॉलेजों में तैनाती के लिए दस फीसदी से अधिक तबादले करने की छूट मांगी गई थी। इस पर उच्चस्तरीय समिति सहमत नहीं हुई लेकिन इसके अभी भी प्रयास जारी हैं। तबादले हर हाल में होंगे।
- डॉ. धनसिंह रावत, उच्चशिक्षा मंत्री, उत्तराखंड