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दवा है नहीं कैसे नियंत्रित करेंगे टीबी

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टीबी रोग
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हल्द्वानी। 2024 तक देश से टीबी खत्म करने की बात हो रही है मगर जमीनी हकीकत यह है कि टीबी रोगियों का इलाज करने के लिए बेस अस्पताल में बने जिला क्षय रोग निवारण केंद्र और राजकीय मेडिकल कॉलेज के टीबी एवं श्वास रोग विभाग में दवाओं का संकट है।
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टीबी मरीजों को पूर्व में सप्ताह में तीन दिन दवा दी जाती थी। केंद्र सरकार ने टीबी को नियंत्रित करने के उद्देश्य से नीति में कुछ बदलाव किया। टीबी रोगियों को अब पूरे सप्ताह दवा दी जाती है। नई नीति के अनुसार टीबी रोगी को वजन के अनुसार दवा दी जा रही है। 25 से 39, 40 से 54, 55 से 60 और 70 किलोग्राम या अधिक को वजन के हिसाब से दवा दी जाती है। फरवरी में सक्रिय रोगी खोजो अभियान चला था तभी दवाएं नहीं थी। अब भी 25 से 39 और 70 किलोग्राम से अधिक वजन वालों के लिए दवा नहीं है। नैनीताल जिले में वर्ष 2016 में लगभग 1500 सौ मरीजों में 31 मरीजों की जान टीबी के कारण चली गई थी। राज्य क्षय रोग नियंत्रण अधिकरी डॉ. वी काला ने बताया कि दवाओं का कोई संकट नहीं है। 25 किलोग्राम भार वाले रोगी का अगर इलाज करना है तो दवा की खुराक में एक गोली बढ़ा दी जाएगी। इसी तरह 70 किलोग्राम वाले मरीज के इलाज में भी एक दवा बढ़ाकर इलाज हो जाएगा।
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25 से 39 और 65 वर्ष से अधिक वजन वाले मरीजों के लिए नहीं है टीबी की दवा
वर्ष 2016 में नैनीताल जिले से 16 लोगों की हुई थी टीबी की मौत
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