नैनीताल। उच्च न्यायालय ने कुमाऊं के पर्वतीय क्षेत्रों में सड़कों और पुलों की भार वहन क्षमता को नजरअंदाज करते हुए भारी वाहनों के उपयोग के मामले में सरकार से दो सप्ताह में जवाब देने को कहा है। इस मामले में शुक्रवार को न्यायालय में अविलंब सुनवाई के लिए याचिका दायर की गई।
अधिवक्ता सुंदर सिंह मेहरा ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि कुमाऊं के पर्वतीय क्षेत्रों के पुल वर्षों पुराने हैं और सड़कें संकरी है। सड़कों की अधिकतम भार वहन क्षमता 90 क्विंटल तक ही है। पूर्व में सर्वोच्च न्यायालय ने भी पर्वतीय मार्गों पर सड़कों भारी वाहन ले जाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस आदेश का पालन करने के लिए कुमाऊं आयुक्त को आदेश दिया गया था। इस आदेश का पालन नहीं हुआ।
याची के मुताबिक भारतीय खाद्य निगम ऐंचोली (पिथौरागढ़) के 200 क्विंटल भार क्षमता वाले ट्रक चल रहे हैं। टनकपुर-चंपावत-पिथौरागढ मार्ग पर खाद्य निगम भारी वाहनों का संचालन करवा रहा है। इससे इसी साल सेराघाट का पुल क्षतिग्रस्त हो गया। सड़कों की सुरक्षा दीवारें भी कमजोर हो रही हैं। देवभूमि ट्रक एसोसिएशन (पिथौरागढ़) के अध्यक्ष शमशेर सिंह ने भी कुमाऊं मंडलायुक्त को इस मामले में प्रत्यावेदन दिया था। इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ ने सरकार को दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए। इस मामले की सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी।