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आईबी को आरटीआई में देनी होगी संजीव चतुर्वेदी पर बनाई रिपोर्ट

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हल्द्वानी। भारतीय वन्य सेवा के अधिकारी संजीव चतुर्वेदी पर बनाई रिपोर्ट सूचना के अधिकार में देने के मामले में देश की खुफिया एजेंसी इंटलीजेंस ब्यूरो (आईबी) को झटका लगा है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने आईबी की संजीव चतुर्वेदी पर बनाई रिपोर्ट संजीव को देने के केंद्रीय सूचना आयोग के फैसले को सही ठहराया है। उच्च न्यायालय ने आईबी को संजीव चतुर्वेदी को सूचना के अधिकार में रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं। यह पहला मामला है जब न्यायालय ने केंद्रीय खुफिया एजेंसी को सूचना के अधिकार के तहत जानकारी देने के निर्देश दिए हैं।
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केंद्र में एनडीए की सरकार बनते ही जुलाई 2014 में संजीव चतुर्वेदी को एम्स के चीफ विजिलेंस ऑफिसर (सीवीओ) के पद से हटाया गया तो इस मामले ने तूल पकड़ा था। इधर केंद्र सरकार ने जुलाई 2014 में खुफिया एजेंसी आईबी से संजीव चतुर्वेदी की एक रिपोर्ट बनाने को कहा। आईबी ने रिपोर्ट बनाकर सौंप दी लेकिन संजीव को नहीं दी। संजीव ने दिसंबर 2015 में सूचना के अधिकार के तहत आईबी से रिपोर्ट मांगी लेकिन आईबी ने सूचना के अधिकार अधिनियम की धारा 24 का हवाला देते हुए रिपोर्ट देने से इन्कार कर दिया। इसके बाद संजीव ने केंद्रीय सूचना आयोग में इसकी अपील की।
आयोग ने 21 अप्रैल 2016 में फैसला देते हुए कहा था कि धारा 24 में यह भी स्पष्ट है कि अगर मामला भ्रष्टाचार व मानवाधिकार के उल्लंघन से जुड़ा हो तो इसकी सूचना दी जा सकती है। इस पर आईबी ने जून 2016 में केंद्रीय सूचना आयोग के इस फैसले के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय से स्टे लिया और चुनौती दी। आईबी ने न्यायालय में तर्क दिया कि सूचना अधिकार अधिनियम की धारा 24 में भ्रष्टाचार और मानवाधिकारों का उल्लंघन का उल्लेख तो है लेकिन यह नियम सिर्फ आईबी के विभागीय अधिकारियों और कर्मियों पर ही लागू होता है, बाहरी व्यक्तियों पर नहीं होता है। इस बाबत आदर्श शर्मा के केस का भी हवाला दिया गया। साथ ही यह भी बताया था कि संजीव की जान को खतरा था इसलिए रिपोर्ट बनाई गई थी।
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उच्च न्यायालय ने पूरे मामले की सुनवाई के बाद 17 मई 2017 को फैसला लिया जो तीन माह के लिए सुरक्षित रखा गया। इधर 25 अगस्त को उच्च न्यायालय ने आईबी के सारे तर्कों को खारिज करते हुए केंद्रीय सूचना आयोग के फैसले को सही ठहराया है। अब आईबी को निर्देश दिए गए हैं कि आईबी तैयार रिपोर्ट संजीव को दे। न्यायालय ने यह भी कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने में संजीव चतुर्वेदी को राजनेता, अफसरशाही से उत्पीड़न झेलना पड़ा।

ये है धारा 24
सूचना के अधिकार अधिनियम की धारा 24 के अंतर्गत राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संगठनों को सूचना अधिकार के दायरे से बाहर रखा गया है। इसी के तहत केंद्रीय खुफिया एजेंसियां किसी भी प्रकार की रिपोर्ट देने से इन्कार कर देती हैं।
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