द्वितीय विश्व युद्ध में शहीद हुए सैनिक राम सिंह की विधवा को 74 साल बाद पूरी पेंशन मिली है। पेंशन दिलाने के लिए जिला सैनिक कल्याण अधिकारी करीब एक साल से प्रयासरत थे। रक्षा लेखा नियंत्रक के निर्देश पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने सोमवार को विशेष पेंशन का भुगतान कर दिया।
पिथौरागढ़ जिले के वनकोट गणाई गंगोली निवासी राम सिंह 11 जनवरी 1936 में हैदराबाद रेजीमेंट में भर्ती हुए थे। कुछ दिनों बाद द्वितीय विश्व युद्ध छिड़ गया। 24 जुलाई 1944 को राम सिंह शहीद हो गए। उनकी पत्नी अनुली देवी विवाह के दो साल बाद विधवा हो गई। अनुली का बाल विवाह हुआ था। इस घटना के बाद विशेष पारिवारिक पेंशन की स्वीकृति तो मिली लेकिन उन्हें सामान्य पेंशन मिल रही थी। पढ़ी-लिखी नहीं होने के कारण उन्होंने अपना जीवन अपने गांव में काट दिया।
समाज के संस्कारों से बंधी अनुली देवी ने दूसरी शादी के बारे में भी विचार नहीं किया। कुछ लोगों ने बताया कि उसे 11 हजार रुपये प्रतिमाह कम पेेंशन मिल रही है। इस मामले में उनके भतीजे पूर्व सैनिक दरपान सिंह ने फरवरी 2017 में जिला सैनिक कल्याण अधिकारी मेजर (रि.) बीएस रौतेला से संपर्क किया। मेजर ने बैंक और विभाग से जानकारी हासिल की। इस मामले में उन्होंने इलाहाबाद स्थित रक्षा विभाग के मुख्य लेखा नियंत्रक से संपर्क किया।
काफी पत्राचार के दौरान लेखा नियंत्रक ने गड़बड़ी को स्वीकार करते हुए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को पूरी पेंशन एरियर के साथ भुगतान करने के निर्देश दिए। जिला सैनिक कल्याण अधिकारी को सोमवार को स्टेट बैंक से जानकारी मिली कि अनुली देवी की पेंशन बढ़कर दो गुना से अधिक मिल गई है। एरियर का भी खाते में भुगतान कर दिया गया है। उम्र के आखिरी पड़ाव में करीब 90 वर्ष की अनुली देवी को न्याय मिला है।
मैं हर शिकायत को चुनौती के रूप में लेता हूं। यही कारण है कि लगभग सौ फीसदी मामलों में सफलता मिलती है। पूर्व सैनिक या उनके परिवारों को न्याय मिला है। एक व्यक्ति को न्याय दिलाना राष्ट्र सेवा है।
मेजर बीएस रौतेला जिला सैनिक कल्याण अधिकारी