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नागरिकता की फाइलें चलती रह गईं और रेशमा दुनियां से चली गई

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नैनीताल। शादी करके पाकिस्तान से नैनीताल पहुंचीं रेशमा ने भारतीय नागरिकता के लिए कई प्रयास किए। नागरिकता की फाइलें प्रशासन और शासन स्तर पर चलती रहीं मगर कुछ हासिल नहीं हुआ। अब 62 साल की उम्र में रेशमा दुनिया से ही चली गईं।
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नाजमाबाद कराची पाकिस्तान की मूल निवासी रेशमा तीन दशक पहले डॉ. जावेद खुर्शीद से निकाह करके सरोवर नगरी आईं थीं। शुरुआत से वह दीर्घकालीन वीजा पर भारत आई थीं। उन्होंने भारतीय नागरिकता के लिए कई बार प्रयास किए। साल 2013 उनके पति डॉ. जावेद का भी इंतकाल हो गया था। रेशमा के जानने वाले बताते हैं कि उन्हें इस बार सितंबर में नागरिकता मिलने की उम्मीद थी। नागरिकता देने संबंधी फाइल चल रही थी।


नागरिकता की फाइलें दौड़ती रह गईं और रेशमा दुनिया छोड़ गईं
दशकों पहले पाकिस्तान से शादी करके सरोवर नगरी आई महिला को नहीं मिल सकी भारतीय नागरिकता


यह है नागरिकता की प्रक्रिया
नागरिकता के लिए पहले जिलाधिकारी कार्यालय में आवेदन करना होता है। डीएम की स्वीकृति के बाद फाइल राज्य और फिर केंद्र सरकार के पास पहुंचती है। इस दौरान कई बार उच्च स्तरीय जांच होती है। अगर जांच में एक भी बिंदु गड़बड़ाया तो मान्यता की फाइल जहां की तहां रह जाती है।
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भारतीय नागरिकता का फरहत को भी इंतजार
नैनीताल। मल्लीताल में रहने वाली फरहत हबीब की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। दशकों पहले शादी करने के बाद वह सरोवर नगरी में रहने लगीं। उन्होंने भी कई बार भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। उन्हें आज भी भारतीय नागरिकता का इंतजार है, लेकिन कब मिलेगी कुछ पता नहीं है। फरहत के रिश्तेदार बताते हैं कि कुछ तो नागरिकता के नियमों में जटिलता है और कुछ फरहत के प्रयासों में भी कमी रह गई। आज उनके बच्चे जवान हो गए और अच्छे पदों पर कार्यरत हैं।

नागरिकता न मिलने से यह होती है परेशानी
नैनीताल। भारतीय नागरिक न होने के कारण किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल पाता है। जैसे सरकार की ओर से दी जाने वाली आर्थिक सहायता, खाद्य पदार्थों में रियायत और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं। उन्हें वोट डालने का भी अधिकार नहीं होता।
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