जोहार महोत्सव 2018 में फैंसी ड्रेस शो में भाग लेने वाले बच्चे।
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हल्द्वानी। लोक परंपराएं, पारंपरिक पहनावा, खानपान को सहेजने की जरूरत है, तभी आने वाली पीढ़ी को समृद्ध संस्कृति की विरासत सौंपी सकती है। जोहार महोत्सव की सांस्कृतिक संध्या के दूसरे दिन बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे पद्मश्री और सात बार एवरेस्ट फतह करने वाले लवराज सिंह धर्मशक्तू ने कुछ इस तरह अपने मन की बातें साझा की। जोहार महोत्सव में पहुंचकर जहां उन्होंने महोत्सव की शान बढ़ाई, वहीं नई पीढ़ी से अपनी संस्कृति को सहेजकर रखने की अपील की।
बीएसएफ देहरादून में में बतौर सहायक कमांडेंट सेवाएं दे रहे लवराज ने अमर उजाला ने विशेष बातचीत में कहा कि जोहार महोत्सव जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रम संस्कृति और सभ्यता को बचाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। एवरेस्ट पर अपने अगले अभियान पर बताते हुए लवराज ने कहा कि फिलहाल देश के बाहर की दो-तीन कंपनियों से मिशन एवरेस्ट को लेकर अगले महीने रिसर्च, ट्रेनिंग संबंधी बात होनी है। अगर सब कुछ ठीक ठाक रहा तो 2019 में एक बार फिर एवरेस्ट फतह कर देश का नाम रोशन करेंगे। जोहार महोत्सव में पद्मश्री लवराज अपने पुत्र ओजस तेनसिंह धर्मशक्तू के साथ पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि उनकी धर्मपत्नी रीना कौशल धर्मशक्तू देहरादून में किसी कार्यक्रम में होने की वजह से जोहार महोत्सव में नहीं आ पाईं। पर्वतारोही रीना मुनस्यारी में पं. नैन सिंह सर्वेयर माउंटेनियरिंग इंस्टीट्यूट में बतौर ओएसडी कार्यरत हैं। रीना देश की पहली महिला पर्वतारोही हैं, जिनके नाम -40 (माइनस 40) डिग्री तापमान पर दक्षिण ध्रुव की 900 किमी की यात्रा तय करने रिकॉर्ड दर्ज है।