हल्द्वानी। गौला नदी के अब तक के इतिहास में पहली बार घोड़ा बुग्गी से खनन निकासी में ई रवन्ना लागू किया जाएगा। हाल ही में हुई जिला खनन समिति की बैठक में यह फैसला लिया गया है। घोड़ा बुग्गी वालाें की खनन सामग्री की निकासी के लिए एकमात्र इंदिरा नगर गेट ही हैं।
गौला नदी में 11 गेटों पर खनन किया जाता है। इनमें इंदिरा नगर गेट में 200 से ज्याद बुग्गियों से खनन निकासी होती है। पिछली हरीश रावत सरकार ने ई रवन्ना लागू किया था। नदी के सभी गेटों पर ई रवन्ना लागू हो गया था लेकिन इंदिरा नगर गेट में घोड़ा बुग्गी से खनन होने पर ई रवन्ना लागू नहीं किया जा सका था। इधर इस साल जिला खनन समिति की बैठक में फैसला लिया गया कि घोड़ा बुग्गी पर भी ई रवन्ना लागू किया जाएगा। बैठक में शिकायतें सामने आई कि घोड़ा बुग्गी वाले एक पर्ची की आड़ में सात, आठ चक्कर लगाते हैं। वहीं स्टाक की अनुमति न होने के बाद भी सैकड़ों कुंतल माल स्टाक करते हैं। फिर इसी स्टॉक की आड़ में अवैध खनन कर माल बेचते हैं। जिससे सरकार को लाखों करोड़ों का चूना लगता है। इसके बाद घोड़ा बुग्गी से होने वाले खनन को नियमित करने के मकसद से ई रवन्ना लागू करने का फैसला लिया गया है। इस बाबत वन विकास निगम को जिम्मेदारी सौंपी गई है। वन विकास निगम इंदिरा नगर गेट पर इंटरनेट कनेक्टिविटी, कंप्यूटर संसाधन वगैरह मुहैया कराएगा। वहीं निगम ने भी सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।
ई रवन्ना इस तरह लागू होगा
घोड़ा बुग्गी वालों को वन विकास निगम में पंजीकरण किया जाता है। अब पंजीकरण संख्या को यूके 04 बी 0001 सीरीज की तरह दिया जाएगा। इसकी बाकायदा प्लेट बनाकर बुग्गियों पर लगाई जाएगी। बाद में इसी नंबर के आधार पर बुग्गियों का ई रवन्ना लागू होगा। फिर रवन्ने से उप खनिज की निकासी की जाएगी। बुग्गी वालों को माल को यहां वहां से ले जाने के लिए भी रवन्ने की जरूरत होगी।
ई रवन्ने के ये होंगे फायदे
- एक पर्ची की आड़ में सात-आठ चक्कर नहीं लगेंगे, अवैध खनन बंद होगा।
- ई रवन्ना लागू होने के बाद उप खनिज को एक से दूसरी जगह ले जाने के लिए रवन्ना जरूरी होने से अवैध उप खनिज की निकासी रुकेगी।
- घोड़े बुग्गी की आड़ में अवैध स्टॉक नहीं होगा, उप खनिज सीधे गंतव्य तक पहुंचाया जाएगा।
- वन, वन निगम कर्मियों से होने वाली झड़प भी बंद होगी।
कोट
इंदिरा नगर गेट में रवन्ना लागू करने के लिए सभी तैयारियां कर ली गई हैं। घोड़ा बुग्गी पर ई रवन्ना लागू होेने पर अवैध खनन कम होगा, राजस्व की बढ़ोत्तरी होगी।
- एमपीएस रावत, क्षेत्रीय प्रबंधक, वन विकास निगम हल्द्वानी।