हल्द्वानी। तमाम प्रयासों के बाद भी स्वास्थ्य विभाग, प्रशासन और नगर निगम डेंगू को नियंत्रित नहीं कर पा रहा है। एलाइजा जांच के बाद डेंगू के 68 नए मरीज सामने आए हैं। डेंगू मरीजों की संख्या अब तक 1985 हो चुकी है।
डेंगू का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। बेस अस्पताल में 46, एसटीएच में 16 और निजी लैब में 06 डेंगू के मरीज मिले हैं जबकि बेस में 59, एसटीएच में 27 और निजी अस्पतालों में डेंगू के 18 मरीज भर्ती हैं। एसटीएच और बेस में बुखार और डेंगू के 268 मरीज भर्ती हैं। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि कुसुमखेड़ा, दुर्गा विहार, कृष्णा विहार, एकता विहार, गांधी नगर और गफूर बस्ती में 739 घरों में फागिंग कराने के साथ ही डेंगू का लार्वा नष्ट किया गया। खालसा ऐड इंटरनेशनल की ओर से पिछले तीन दिनों से राजपुरा और बनभूलपुरा क्षेत्र में लगातार फागिंग की जा रही है।
आयुष्मान योजना के चार ऑपरेशन टाले
हल्द्वानी। सुशीला तिवारी अस्पताल में आयुष्मान योजना के तहत इलाज के लिए आने वाले मरीजों को धक्के खाने पड़ रहे हैं। एक विभाग की मनमर्जी के बाद पूरा अस्पताल प्रबंधन बौना साबित हो रहा है। शनिवार को चार ऑपरेशन टाल दिए गए। हालांकि जब मामला प्राचार्य तक पहुंचा तो तीन ऑपरेशन हो पाए।
आयुष्मान के तहत शनिवार को ऑपरेशन के लिए चार केस लगे थे। बताया जा रहा है कि जरूरत के 28 सामान में 27 मंगवा दिए गए हैं जबकि सिलिकान हेडरिंग लक्जरी आइटम में होने के कारण नहीं मंगवाया जा रहा है। मरीज के परिजन लक्जरी आइटम भी खरीदकर लाने को तैयार थे मगर एक विभाग के विभागाध्यक्ष की जिद भारी पड़ गई। विभागाध्यक्ष ने कहा कि सामान अस्पताल की ओर से खरीदकर दिया जाएगा। इसके चलते चारों ऑपरेशन टाल दिए गए। मरीजों के परेशान तीमारदार प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा के पास पहुंचे और शिकायत की। प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा ने बताया कि विभागाध्यक्ष को बुलाकर बात की थी। उनके हस्तक्षेप करने के बाद देर शाम तीन ऑपरेशन हुए।
पर्चा बनाने का कहा तो बताया, प्रिंटर खराब है
हल्द्वानी। एसटीएच में पर्चा बनाने को लेकर विवाद हो गया। शनिवार को पर्चा बनवाने के लिए महिलाएं और पुरुष अलग-अलग लाइन में लगे थ। महिलाओं की लाइन कम थी और पुरुषों की लाइन अधिक थी जबकि एक काउंटर खाली पड़ा था। पूछने पर पता चला कि प्रिंटर खराब है। एमएस डॉ. अरुण जोशी ने समय से प्रिंटर ठीक कराने की नसीहत दी ताकि मरीजों को परेशानी न हो। इस पर कुछ कर्मी नाराज होकर सीधे एमएस के पास पहुंच गए और विरोध जताने लगे। डॉ. जोशी ने सभी काउंटर को सुचारु रूप से चलाने के आदेश दिए। कुछ देर बाद मामला निपटा और काम शुरू हो गया।