इस बार का मानसून कुमाऊं में तराई के लिए संकट का संकेत दे गया। ऊधमसिंह नगर में इस बार बारिश सामान्य से 43 प्रतिशत कम रही। पर्वतीय जिलों में बागेश्वर पर इस बार बारिश मेहरबान नजर आई।
इस जिले में कुमाऊं क्षेत्र में सबसे अधिक बारिश रिकार्ड कर गई। मानसून में मौसम बदलाव की धमक भी साफ महसूस की गई। पूरे मानसून में कुमाऊं में 6576 मिमी बारिश रिकार्ड की गई।
मानसून के इस बार के पैटर्न में मौसम के बदला मिजाज भी सामने आया। मौसम विभाग के मुताबिक बागेश्वर में सामान्य रूप से मानसून में होने वाली 858 मिमी बारिश की तुलना में इस बार 1096 मिमी बारिश हुई।
यह सामान्य से 28 प्रतिशत अधिक है। दूसरी ओर, पिथौरागढ़ में सामान्य से 25 प्रतिशत कम बारिश हुई। इतना होने पर भी मानसून बस्तड़ी का दर्द दे ही गया। बस्तड़ी में भूस्खलन की वजह विशेषज्ञ कम अवधि में ज्यादा बारिश होने को मान रहे हैं।
बारिश की इस तीव्रता के कारण कुमाऊं में मानसून के दौरान करीब दो दर्जन से अधिक सड़क मार्ग बंद रहे। नैनीताल जिले में शुरुआती दौर में बेहतर बारिश रिकार्ड की गई थी। मानसून केविदा होते-होते नैनीताल में यह बारिश सामान्य से आठ प्रतिशत अधिक पर आकर सिमट गई।
इसका ठीक उल्टा हाल अल्मोड़ा जिले का रहा। अल्मोड़ा में सामान्य बारिश रही, हालांकि शुरूआती दौर में इस जिले में सामान्य से 27 प्रतिशत अधिक बारिश रिकार्ड की गई थी। चंपावत में भी अगस्त माह तक मानसून सामान्य था। मानसून के विदा होते-होते यहां पर बारिश सामान्य से 12 प्रतिशत कम पर आकर सिमट गई।