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मल्ली बमौरी को नहीं है नगर निगम की जरूरत

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हल्द्वानी। मल्ली बमौरी के लोगों का कहना है कि नगर निगम से बेहतर विकास तो इस गांव का हुआ है। हर गली में सोलर लाइटें, चकाचक सड़कें, रोजाना कूड़ा कलेक्शन होता है। नगर निगम को विकास क्या होता है यह इस गांव से सीखने की जरूरत है।
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शहर से सटा हुआ गांव मल्ली बमौरी है। 2011 की जनगणना के मुताबिक इस गांव में 4,000-4,500 मतदाता हैं। बेशक गांव में 15 फीसदी खेती की जमीन है लेकिन फार्म स्तर पर हो रही यह खेती दर्जनों मजूदरों को रोजी रोटी देती है। 15 गलियों वाले इस गांव में सड़क, पानी, बिजली की सुविधाएं नगर निगम से बेहतर है। ग्राम प्रधान का दावा है कि 15 करोड़ रुपये की विधायक निधि से सीसी एवं डामरीकरण वाली सड़कों एवं पेयजल लाइनों का जाल बिछाया गया है। 220 सोलर लाइटों से गांव की गलियों को रोशन किया जाता है। जिला पंचायत की चार गाड़ियां रोजाना कूड़ा कलेक्शन करती है। चेतावनी दी कि नगर निगम के सभी वार्ड खुले में शौच मुक्त नहीं हो सके हैं जबकि स्वच्छता के लिए इस गांव को 2016 में स्वच्छता पुरस्कार से नवाजा गया। उन्होंने विरोध के बाद भी गांव को नगर निगम में शामिल करने का आरोप लगाया। वहीं ग्रामीणों ने भी एक सुर में निगम में शामिल होने का विरोध किया। आरोप लगाया कि बिना किसी राय शुमारी के गांव को निगम में शामिल किया गया है।

नगर निगम पर साधनों एवं संसाधनों की कमी हैं। जहां कार्यालय है वहीं सीवर लाइन, स्ट्रीट लाइट नहीं है जबकि गांव में 220 सोलर लाइटें व चकाचक सड़के हैं। बिना किसी राय शुमारी के गांव को जबरन निगम में शामिल किया गया है।
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मुकुल बल्यूटिया, ग्राम प्रधान मल्ली बमौरी

नगर निगम का हमारे गांव से सीखना चाहिए कि विकास क्या होता है, नगर निगम में शामिल होकर गांव की सूरत बिगड़ जाएगी।
भावना पांडे

नगर निगम बिजली, सीवर लाइन की सुविधाएं दे तो कर चुकाने व शामिल होने में समस्या नहीं है लेकिन अगर हालात फिर भी वैसे रहे तो गांव ही बेहतर है।
पार्वती डोगरा

शहर से सटा सुंदर गांव है, अब नगर निगम में शामिल होेंगे तो दुनिया भर के कर बढ़ जाएंगे और सुविधाएं नगर निगम एक भी नहीं दे पाएगा।
विष्णु दत्त तिवारी
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