हल्द्वानी। चंडीगढ़ पीजीआई में न्यूरो सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. एमके तिवारी ने कहा कि रीढ़ की हड्डी या दिमागी चोट लगने के मरीज अगर अस्पताल आते हैं और न्यूरो सर्जन नहीं होता है तो अस्पताल बिना मरीज को देखे ही सीधे दूसरे अस्पताल ले जाने को कह देते हैं। यह चिकित्सीय सिद्धांतों के विपरीत है। अगर अस्पताल में विशेषज्ञ डाक्टर नहीं है तो भी मरीज की जांच की जानी चाहिए और उसे प्राथमिक इलाज दिया जाना चाहिए।
उत्तराकॉन 2017 में प्रो. एमके तिवारी ने कहा कि रीढ़ की हड्डी एवं दिमागी चोट के मरीज में ब्लड प्रेशर, पल्स, आक्सीजन का स्तर आदि की जांच कर लेनी चाहिए। साथ ही अगर कहीं से खून बह रहा है और संभव है तो टांके लगाकर खून रोक देना चाहिए। बेहोशी की स्थिति में मरीज हो तो पेशाब नली और आक्सीजन का स्तर कम हो तो आक्सीजन नली लगा देनी चाहिए।
श्रीराममूर्ति अस्पताल बरेली में स्त्री और प्रसूति रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. जेके गोयल ने कहा कि प्रसव से पूर्व और प्रसव के दौरान महिलाओं का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। इसके लिए गर्भवती महिलाओं को भी जागरूक किया जाना चाहिए। इस दौरान उत्तराकॉन के आयोजक अध्यक्ष डॉ. जेएस खुराना, आयोजक सचिव डॉ. अजय पाल, चिकित्सा-शिक्षा निदेशक डॉ. आशुतोष स्याना, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कालेज डॉ. सीपी भैसोड़ा, डॉ. पंकज हरि गुप्ता, डॉ. केसी लोहनी, डॉ. अनिल अग्रवाल, डॉ. मोहन तिवारी, डॉ. डीसी पंत, डॉ. आरके खुराना, डॉ. महेश शर्मा, डॉ. पुनीत गोयल, डॉ. रवि अदलखा, डॉ. ऋतु त्रिपाठी, डॉ. श्रद्धा प्रधान स्याना, डॉ. अमित सुयाल, डॉ. पूजा सुयाल, डॉ. आईपी अरोड़ा, डॉ. राहुल सिंह, डॉ. अमरपाल सिंह, डॉ. पुनीत गोयल आदि थे।
पिथौरागढ़ में लिंगानुपात चिंता का विषय
हल्द्वानी। सरकारी अस्पताल भ्रूण लिंग जांच के लिए सबसे सुरक्षित स्थान हैं। बाबूओं की साठगांठ से लिंग जांच होती है और डॉक्टर बाहर आकर महिला को बता देते हैं। पिथौरागढ़ का घटता लिंगानुपात चिंता का विषय है। नेपाल के करीब होने के कारण लोग भ्रूण लिंग जांच कराकर आ जाते हैं। पीसीपीएनडीटी एक्ट के पालन भारत सरकार हर कीमत पर कराना चाहती है।
मुजफ्फरनगर मेडिकल कालेज में एसोसिएट प्रोफेसर और नेशनल इंसपेक्शन मानीटरिंग कमेटी के सदस्य डॉ. सुभाष बालियान ने कहा कि उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश समेत कुछ राज्यों में अभी कमेटी नहीं बनी है। कहीं अगर भ्रूण लिंग की जांच होती है तो उसकी सूचना जिलाधिकारी को दी जानी चाहिए और जिलाधिकारी के स्तर से कार्रवाई होनी चाहिए। मगर डीएम स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों-कर्मियों को भेज देते हैं और इनकी साठगांठ होने के कारण मामला खुल नहीं पाता है। महाराष्ट्र में 48 सरकारी डाक्टरों को भ्रूण लिंग जांच में पकड़ा गया था। ऐसे डॉक्टर बहुत ताकतवर होते हैं और उनके तार भी कई लोगों से जुड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि कमेटी के सदस्य को भारत सरकार के संयुक्त सचिव के बराबर अधिकार होते हैं। भारत सरकार के माध्यम से कमेटी सर्वोच्च न्यायालय के प्रति जवाबदेह होती है।
एनस्थीसिया से पहले और बाद में मरीज पर रखें नजर
हल्द्वानी। सरगंगा राम अस्पताल के एनस्थीसिया विभाग में वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. भुवन पांडे ने कहा कि ऑपरेशन से पहले मरीज की पूरी जांच करने के बाद एनस्थीसिया की डोज देनी चाहिए। किसी व्यक्ति की तबियत अगर अधिक खराब हो तो एनस्थीसिया की डोज कम देनी चाहिए। ऑपरेशन के बाद भी मरीज का ब्लड प्रेशर, पल्स, हार्ट बीट और आक्सीजन स्तर पर ध्यान रखना चाहिए।
ये है आईएमए उत्तराखंड की नई प्रदेश कार्यकारिणी
डॉ. बीसी पांडे प्रदेश अध्यक्ष, डॉ. डीडी चौधरी प्रदेश सचिव, डॉ. नीता मेहरा एवं डॉ. एसके गुप्ता प्रदेश उपाध्यक्ष, डॉ. संजय उप्रेती प्रदेश कोषाध्यक्ष, डॉ. जेएस खुराना चेयरमैन आईएमए/एएमएस, डॉ. डीसी पंत डायरेक्टर आईएमए/सीजीएस, डॉ. वीके छाबड़ा मीडिया सेल, अनुशासन कमेटी डॉ. आरएन सिंह, डॉ. केसी लोहनी मरीज-डाक्टर की शिकायत, डॉ. राहुल सिंह एवं डॉ. अजय पाल संपादक अकादमिक।