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राज्य की आय तो बढ़ी लेकिन केंद्र पर निर्भरता कम न हुई

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हल्द्वानी। राज्य गठन के 17 साल बाद भी विकास उत्तराखंड के लिए पहेली बना हुआ है। इन सालों में प्रदेश में कर से कमाई 30 गुना बढ़ी, लेकिन विकास योजनाओं के लिए प्रदेश आज भी केंद्र का मुंह ताकने को विवश है। हाल यह है कि पहाड़ और मैदान के बीच असमानता की खाई लगातार बढ़ रही है।
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जब उत्तराखंड राज्य का गठन हुआ था तब उत्तर प्रदेश से वाणिज्य कर महकमे से अनुमानित 120 करोड़ की रकम प्राप्त हुई थी। नवजात उत्तराखंड ने संभलते हुए 2000-01 में 233 करोड़ का मुश्किल लक्ष्य न केवल तय किया बल्कि इसे हासिल भी किया। राज्य गठन के दो साल तक अंतरिम सरकार के बाद 2002 में कांग्रेस की सरकार आई और नारायण दत्त तिवारी को सूबे का मुखिया बनाया गया। बस यहीं से तस्वीर बदलनी शुरू हुई। 2005 में तिवारी सरकार ने ठोस औद्योगिक नीति तैयार की। उद्योगों की स्थापना के लिए हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर को सिडकुल के लिए चयनित किया गया। उद्योगों की स्थापना और कर नीति में रियायत मिलने पर टाटा, बजाज, अशोक लीलैंड, पारले, ब्रिटानिया, नेस्ले, आयशर, महिंद्रा जैसी देश की नामी कंपनियों ने उत्तराखंड में अपनी फैक्ट्रियां स्थापित कीं। ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार में ही 800-900 बड़ी छोटी फैक्ट्रियां स्थापित हो गईं।
हालांकि, उद्योग पहाड़ नहीं चढ़ सके इस कारण विकास सिर्फ मैदानी जिलों तक ही सीमित रह गया है। स्पष्ट औद्योगिक नीति नहीं होने की वजह से उद्यमियों ने पहाड़ की ओर रुख नहीं किया और पहाड़ सिर्फ पत्थर, खड़िया, रेता के दोहन तक ही सीमित रह गए। इनका कथित खनन माफिया ने अनैतिक दोहन किया। बावजूद इसके उत्तराखंड ने सिर्फ वाणिज्य कर महकमे से ही आय में निरंतर सुधार किया।
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विकास की रफ्तार
गतिविधियां वर्ष आय (करोड़ों में)
राज्य गठन 2000 120
पहला साल 2000-01 233
वैट लागू होने पर 2005-06 1005
वस्तु एवं सेवा कर पर 2017-18 7,000

नोट :- यह आंकड़े राज्य कर की वेबसाइट से लिए गए हैं।

पेट्रोलियम उत्पादों से एक तिहाई आय

राज्य की आय के मुख्य स्रोतों में पेट्रोलियम उत्पादों पर होने वाले कर से मिलने वाली आय है। अधिकारिक जानकारी के मुताबिक हर साल निर्धारित लक्ष्य का करीब 30-33 फीसदी लक्ष्य इन उत्पादों से प्राप्त होता है।

जीएसटी से नुकसान हुआ तो इसकी भी होगी भरपाई

वस्तु एवं सेवा कर में 2014-15 को आधार वर्ष बनाया गया है। इस वर्ष वाणिज्य कर से 5464 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ था। इस लक्ष्य में हर साल न्यूनतम 14 फीसदी की बढ़ोत्तरी अनिवार्य है। अगर यह लक्ष्य हासिल नहीं हुआ तो केंद्र सरकार इस दर से तीन साल तक हुए हर्जाने की भरपाई करेगा।
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