हल्द्वानी। सुशीला तिवारी अस्पताल में एमआरआई मशीन ठप हो गई है। इस कारण मरीजों को निराश लौटना पड़ा।
एसटीएच में एक दिन में 25 से 30 मरीजों के एमआरआई होते हैं। एसटीएच में एमआरआई की दरेें निजी चिकित्सालयों और डायग्नोस्टिक सेंटर से काफी कम है, जबकि निजी चिकित्सालयों और डायग्नोस्टिक सेंटर में एमआरआई की कीमत 55 सौ से 10 हजार रुपये तक है। एसटीएच में एमआरआई मशीन ठप होने से मरीजों को निजी चिकित्सालयों और डायग्नोस्टिक सेंटर में जाना पड़ा, जहां उन्हें एक-एक माह तक की एडवांस में डेट दी जाती है। मौसम खराब होने के कारण पहाड़ से आए सात मरीजों को बिना एमआरआई के ही लौटना पड़ा। एसटीएच के एमएस डॉ. अरुण जोशी ने बताया कि मशीन खराब होने की सूचना इंजीनियरों को दी गई थी। इंजीनियर देर शाम पहुंच गए थे और मशीन ठीक करने में जुटे थे। एक-दो दिन में मशीन ठीक हो जाएगी।
एसटीएच में एमआरआई मशीन ठप, लौटे मरीज
एक दिन में होते हैं 25 से 30 एमआरआई, बाजार में महंगे दरों पर कराना पड़ा एमआरआई
महिला अस्पताल हल्द्वानी को मिला एक लाख का पुरस्कार
हल्द्वानी। स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतर सुविधाएं देने के कारण महिला चिकित्सालय हल्द्वानी को एक लाख रुपये का पुरस्कार मिला है। कायाकल्प की टीम प्रतिवर्ष अस्पतालों का निरीक्षण करती है। स्वच्छता, रिकार्ड का रखरखाव, मरीजों की देखरेख, इंफेक्शन नियंत्रित करने की दर, अस्पताल की सुंदरता, विद्युत व्यवस्था समेत 70 बिंदुओं पर सर्वे होता है। साथ ही अधिकारियों और कर्मचारियों के साक्षात्कार लिए जाते हैं। प्रत्येक बिंदु पर दो अंक मिलते हैं। जिला स्तर के अस्पतालों को तीन लाख रुपये और उपजिला अस्पतालों को एक लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाता है। पुरस्कार मुख्यमंत्री की ओर से सभी अस्पतालों को दिए जाएंगे। खास बात यह है कि महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. भागीरथी जोशी और उनकी टीम के प्रयास से महिला अस्पताल हल्द्वानी को पहली बार एक लाख रुपये का सांत्वना पुरस्कार मिला है। जिला अस्पताल अल्मोड़ा, ऊधमसिंह नगर, बीडी पांडे अस्पताल महिला और पुरुष, सीएचसी गंगोलीहाट, सीएचसी बेतालघाट और सीएचसी अल्मोड़ा को भी पुरस्कार मिला है।
कायाकल्प की टीम ने पिछले माह किया था निरीक्षण, पहली बार मिला पुरस्कार