हल्द्वानी। शनिवार रात रामपुर रोड स्थित एक होटल में कवियों ने कविता के जरिए श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। एक से बढ़कर एक कविता के रसास्वादन कर श्रोताओं ने वाहवाही की। हास्य कवि पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र शर्मा ने अपनी रचनाओं से माहौल में रंगत भर दी।
पति-पत्नियों के बीच चुहलबाजी को हास्य रस में पिरोकर उन्होेंने श्रोताओं को ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा-पहले लोग दीवार के बीच में रहते थे, अब दीवारें उनके बीच हैं, पहले बच्चे मां-बाप के साथ रहते थे अब बच्चों के साथ मां-बाप रहते हैं, संस्कार की जगह केवल कार ने ले ली है। कवयित्री गौरी मिश्रा, लक्ष्मण नेपाली, दीपक सैनी, विनोद पाल ने भी श्रोताओं को गुदगुदाया। इससे पहले कार्यक्रम का शुभारंभ सिटी मजिस्ट्रेट पंकज उपाध्याय ने किया। संचालन अक्की मेहता ने किया। इस मौके पर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संघ के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष डिंपल पांडे और यश इवेेंट मैनेजमेंट के विशाल शर्मा आदि मौजूद रहे।
कुंठित व्यक्ति हास्य कवि नहीं हो सकता
हल्द्वानी। अमर उजाला से बातचीत में कवि सुरेंद्र शर्मा ने कहा कि आज हास्य का पतन हो रहा है। इसके पीछे समाज के लोगों का पैसे की ओर भागना, तनाव है। उन्होंने कहा की कुंठित व्यक्ति कभी भी हास्य कविता नहीं लिख सकता, कवि को हरफनमौला और तनाव से दूर रहने वाला होना चाहिए। बॉलीवुड की ओर फिर रुख करने के सवाल पर उन्होंने कहा की वह अपने इसी हाल में ठीक हैं। संतोष फिल्म के बाद उन्होंने कोई फिल्म नहीं की।