नैनीताल। झील विकास प्राधिकरण ने नैनीताल आसपास के क्षेत्रों में सुनियोजित निर्माण के उद्देश्य से नई महायोजना के लिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। नई महायोजना को इस तरह से तैयार किया जाएगा, जिसमें नैनीताल, भीमताल से लगे कई और गांव भी प्राधिकरण के दायरे में आ जाएंगे। नैनीताल में व्यावसायिक निर्माण प्रतिबंधित होने के बावजूद अवैध रूप से बनाए गए व्यावसायिक भवनों को सूचीबद्ध कराया जा रहा है ताकि उनके स्वामियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके।
झील विकास प्राधिकरण के सचिव श्रीश कुमार ने बृहस्पतिवार को प्रेसवार्ता में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शासन द्वारा वर्ष 1995 में महायोजना तैयार की गई थी जो कि वर्ष 2011 तक के लिए थी। उसके बाद से पुरानी महायोजना के अनुरूप ही काम हो रहा था लेकिन अब नई महायोजना की तैयारी शुरू कर दी गई है। नई महायोजना के तहत नैनीताल, भीमताल समेत इसके आसपास के क्षेत्रों में रोड हेड से पांच सौ मीटर की दूरी तक के गांवों को प्राधिकरण के दायरे में लाने की तैयारी है। उन्होंने बताया कि नई महायोजना का प्रारूप इसी साल 15 दिसंबर तक तैयार कर लिया जाएगा। इसके लिए सैटेलाइट और जीएसआई के नक्शे की मदद ली जाएगी। उन्होंने बताया कि जून 2018 तक महायोजना लागू हो सकेगी। प्राधिकरण सचिव ने बताया कि सरोवरनगरी के जोन एक, जोन दो में रह रहे परिवारों समेत अन्य स्थानों से होने वाले विस्थापन के लिए विस्थापन समिति पूर्व में ही गठित है। उन्होंने बताया कि जोन एक, जोन दो में 361, सूखाताल में 44 भवनों में रह रहे लोगों को विस्थापित किया जाना है। इस संबंध में प्राधिकरण ने जिला प्रशासन, विस्थापन समिति को रिपोर्ट सौंप दी है। विस्थापन के लिए खुर्पाताल में भूमि चयनित की गई है। बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 1995 से सरोवर नगरी में ग्रुप हाउसिंग समेत अन्य व्यावसायिक निर्माण कार्यों में रोक लगाई है, जिसका सख्ती से पालन सुनिश्चित कराया गया, इसके बावजूद कुछ लोगों ने होटल, मकान बनाकर बेचे, जिसकी जांच कराई जा रही है ताकि उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सके। उन्होंने कहा कि हाइकोर्ट के आदेश के बाद नैनीताल सहित प्राधिकरण क्षेत्र में दो किमी परिधि में निर्माण कार्यों प्रतिबंधित है। आवश्यक निर्माण कार्यों के लिए न्यायालय से अनुमति ली जा रही है। वहां परियोजना अधिकारी सीएम साह भी थे।