प्रदेश सरकार ने पांच साल में उर्दू के मात्र 28 पदों के लिए विज्ञप्ति जारी की, जिनमें से 50 फीसदी पद ही भरे जा सके। 14 पद रिक्त रह गए। इसकी बड़ी वजह यह है कि 28 में से 17 पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थे।
वर्ष-2012 के विधानसभा चुनाव में अल्पसंख्यकों को लुभाने के लिए कांग्रेस ने उर्दू शिक्षकों और अनुवादकों की भर्ती का वादा किया था। हरीश रावत के मुख्यमंत्री बनने के बाद कैबिनेट ने भी इस पर मुहर लगा दी थी, लेकिन अभी तक इस पर अमल नहीं हो सका।
बीते दिनों सहायक अध्यापकों के एक हजार से अधिक पदों के साथ उर्दू शिक्षकों के बैकलॉग के 28 पदों पर विज्ञप्ति जारी की गई थी, जिनमें 14 पद रिक्त रह गए हैं। उर्दू शिक्षकों के लिए सामान्य वर्ग के आठ, ओबीसी के दो, एसटी का एक पद था, जबकि एससी के लिए 17 पद आरक्षित कर दिए गए।
विभागीय सूत्रों के अनुसार इनमें सामान्य के आठ, ओबीसी के दो और एससी के चार पदों पर नियुक्तियां हो गई हैं, लेकिन अन्य पद रिक्त हैं।
पहले से रिक्त चल रहे 28 पदों पर ही विज्ञप्ति जारी की गई थी। एससी और एसटी के पात्र अभ्यर्थी नहीं मिल सके, जिसकी वजह से नियुक्तियां नहीं की जा सकी हैं। शासन से दिशा-निर्देश मिलने पर दोबारा विज्ञप्ति जारी की जाएगी।
-सीमा जौनसारी, निदेशक बेसिक शिक्षा