हल्द्वानी। शहर की ब्रिटिशकालीन शीतलाहाट पेयजल योजना का पुनर्गठन किया जाएगा। जलसंस्थान इसका प्रस्ताव तैयार कर रहा है। इस योजना से काठगोदाम के अलावा समूचे हल्द्वानी शहर को पेयजल आपूर्ति की जाती थी। तब इस योजना से 40 से अधिक शेर मुंह के स्टैंड पोस्ट बनाए गए थे। 1980 में योजना का पुनर्गठन किया गया, तब उत्तरप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रभानु गुप्त ने इसका लोकार्पण किया था।
शुक्रवार को जलसंस्थान के ईई विशाल कुमार सक्सेना ने शीतलाहाट पेयजल योजना का निरीक्षण किया। ईई ने बताया कि इस योजना में 2006, 08 में पांच इंच और आठ इंच की नई पेयजल लाइनें बिछाई गईं। पाइपों में तीन इंच तक कैल्शियम जमा होने से स्रोत से प्लांट तक मात्र 150 एलपीएम पानी ही पहुंच पा रहा है, जबकि स्रोत में 250 लीटर प्रति मिनट का डिस्चार्ज है। ज्यादा पानी स्रोत के पास ही बर्बाद हो रहा है। इस पानी के सदुपयोग के लिए 10 इंच की 1200 मीटर नई पेयजल योजना का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। प्राथमिक तौर पर योजना की लागत करीब 20 लाख रुपये आ रही है। योजना को स्वीकृति मिलने पर काठगोदाम के अलावा दमुवाढूंगा क्षेत्र की बड़ी आबादी को इस योजना से लाभ मिलेगा। साथ ही शीशमहल ट्रीटमेंट प्लांट पर भी काफी हद तक निर्भरता कम हो जाएगी।
शीतलाहाट पेयजल योजना का होगा पुनर्गठन
जलसंस्थान तैयार कर रहा प्रस्ताव, 20 लाख रुपये आएगी लागत
पेयजल लाइनों में कैल्शियम जमा होने से नहीं हो पा रही पर्याप्त आपूर्ति
पेयजल शुद्धिकरण को लगा है बॉयलर प्लांट
शीतलाहाट पेयजल योजना से पानी के शुद्धिकरण के लिए बॉयलर प्लांट लगा है। हालांकि वर्तमान में बॉयलर प्लांट से शुद्धिकरण के बजाए सीधे क्लोरीन डालकर पानी को साफ किया जाता है। बॉयलर प्लांट से पानी को साफ करने के पानी को प्लांट में खौलाया जाता था, ताकि पानी में मौजूद सभी तरह के कीटाणु नष्ट हो सकें।