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नैनीताल जिले में एक अप्रैल से बंद हो जाएगा राशन

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राशन - फोटो : अमर उजाला
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हल्द्वानी। शासन ने नैनीताल जिले के 42 हजार यूनिट का गेहूं, चावल बंद कर दिया है। जिले की राशन की दुकानों को मार्च में 1250 क्विंटल चावल, 750 क्विंटल गेहूं का कोटा जारी ही नहीं किया गया।
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सरकारी सस्ते गल्ले के तहत बंटने वाले राशन में अब सरकार ने कैंची चला दी है। शासन ने कारण बताए बिना राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा (एनएफएसए) कार्डधारकों के गेहूं-चावल में कटौती कर दी है। पूर्ति निरीक्षक रवि सनवाल ने बताया कि शासन ने जिले में एनएफएसए के तहत बंटने वाले गेहूं में 750 क्विंटल, चावल में 1250 क्विंटल की कमी की है। उन्होंने बताया कि एनएफएसए के तहत प्रति यूनिट तीन किलो चावल, दो किलो गेहूं दिया जाता है।

जिले के 42 हजार यूनिट का राशन बंद
शासन ने नैनीताल जिले के गेहूं, चावल का कोटा कम किया


राशनकार्ड ऑनलाइन नहीं, 850 परिवारों को नहीं मिलेगा राशन
हल्द्वानी। जिले के 850 परिवारों को सरकारी सस्ता गल्ले की दुकान से मिलने वाला राशन एक अप्रैल से बंद हो रहा है। शासन ने डाटा ऑनलाइन न होने वाले राशनकार्डधारकों का राशन बंद करने के आदेश जारी किए हैं। जिले में पूर्ति विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के कारण जिले में करीब तीन हजार से अधिक राशन कार्ड ऑनलाइन नहीं हो पाए हैं। अब शासन ने ऑनलाइन न होने वाले राशनकार्डधारकों की सब्सिडी चरणबद्ध तरीके से बंद करने के आदेश दिए हैं। पूर्ति निरीक्षक रवि सनवाल ने बताया कि अप्रैल में उन्हीं राशनकार्ड धारकों को राशन मिलेगा, जिनके राशनकार्ड ऑनलाइन हुए हैं।
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बजट बिना कैसे होगी गेहूं खरीद?
हल्द्वानी। बजट की कमी के चलते खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग पर आढ़तियों और राइस मिलों का 300 करोड़ से अधिक का बकाया है। विभाग गेहूं खरीद की तैयारी कर रहा है। अब सवाल ये उठता है कि बिना बजट के गेहूं खरीद कैसे हो पाएगी?
धान खरीद नीति में साफ लिखा है कि आढ़ती किसानों से धान खरीद कर 24 घंटे में उनके खाते में आरटीजीएस करेगा। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग सात दिन में आढ़तियों के खाते में पैसा डालेगा, लेकिन तीन माह बीतने के बाद भी विभाग ने आढ़तियों और राइस मिल को 300 करोड़ से अधिक का बकाया नहीं दिया है। अधिकारी बजट न मिलने के कारण भुगतान न होने की बात कह रहे हैं। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग गेहूं खरीद की तैयारियों में जुटा है। ऐसे में बिना बजट के एक अप्रैल से कैसे गेहूं खरीद शुरू होने पर सवाल उठ रहे हैं।
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धान खरीद का ही 300 करोड़ से अधिक का बकाया है विभाग पर
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