नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय के यूजीसी एचआरडीसी और उपसा की ओर से हरमिटेज सभागार में जल सजीव जीवन चुनौतियां और समाधान विषय पर दो दिनी राष्ट्रीय कार्यशाला शुरू हो गई है। कार्यशाला का उद्घाटन यूकोस्ट के महानिदेशक डॉ. राजेंद्र डोभाल, पर्यावरणविद् प्रो. अजय रावत ने किया।
डॉ. राजेंद्र डोभाल ने कहा कि बाजार में मिलने वाले बोतल बंद पानी हानिकारक है। उन्होंने बताया कि बोतल बंद पानी में ऑक्सीजन की मात्रा काफी कम पाई जाती है। कहा कि केंद्र सरकार की ओर से पानी संकट को देखते हुए 80 से 120 लीटर प्रतिदिन पानी खपत की योजना बनाने पर विचार कर रही है। पर्यावरणविद् प्रो. अजय रावत ने कहा कि भूमिगत जल के लिए पैदा हो रहे संकट के पीछे तालाबों और प्राकृतिक स्रोतों के पास हो रहा अतिक्रमण है। प्रो. रावत ने कहा कि देश के कुछ हिस्सों में किसान एक वर्ष में दो बार धान की खेती की जा रही है। पंत नगर विवि के प्रो. वीर सिंह ने कहा कि लोगों ने जल चक्र को परिवर्तित कर दिया है। डॉ. आनंद शर्मा ने कहा पानी संकट का महत्वपूर्ण कारण कुप्रबंधन है। इस मौके पर यूजीसी मानव संसाधन विकास केंद्र के निदेशक प्रो. बीएस साह, डॉ. रितेश साह, प्रो. बीएस कोटलिया, प्रो. पीसी तिवारी, प्रो. एमसी जोशी, प्रो. एबी मेलकानी, डॉ. आरएस भाकुनी, डॉ. नंदन बिष्ट आदि थे।
बाजार में मिलने वाले बोतल बंद पानी को बताया हानिकारक