हल्द्वानी। भ्रूण लिंग जांच रोकने के लिए साइलेंट ऑब्जर्वर डिवाइस या एक्टिव ट्रैकर तीन दिन के भीतर निजी अल्ट्रासाउंड सेंटरों ने नहीं लगाया तो अल्ट्रासाउंड मशीन सील की जाएगी।
उच्च न्यायालय ने 14 जून को सभी अल्ट्रासाउंड मशीनों में साइलेंट ऑब्जर्वर डिवाइस या एक्टिव ट्रैकर लगाने के आदेश दिए थे। इसी संबंध में डीएम की अध्यक्षता में 12 सितंबर को बैठक हुई थी, जिसमें शीघ्र आदेश का पालन कर रिपोर्ट देने को कहा था। पीसीपीएनडीटी के समन्वयक अनूप बमोला ने बताया कि जिले में 10 सरकारी अस्पतालों में से आठ में साइलेंट ऑब्जर्वर डिवाइस या एक्टिव ट्रैकर लग चुका है, जबकि 37 निजी अल्ट्रासाउंड मशीन सेंटरों और अस्पतालों में चल रही है। बताया कि कुछ ने लगा लिया हैं। डीएम विनोद कुमार सुमन ने बताया कि बृहस्पतिवार को हुई बैठक में तत्काल आदेश पर अमल कर तीन दिन में रिपोर्ट देने को कहा है। डिवाइस न लगाने वाले निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर और निजी अस्पतालों में चल रही अल्ट्रासाउंड मशीन को सील कर दिया जाएगा। बताया कि डिवाइस लगाने के बाद ही मशीन चलाने की अनुमति दी जाएगी।
यह डिवाइस लगानी होगी नहीं तो सील होगी अल्ट्रासाउंड मशीन
डीएम ने निजी अस्पतालों को तीन दिन में रिपोर्ट देने को कहा
ऐसे डिवाइस करेगी काम
साइलेंट ऑब्जर्वर डिवाइस या एक्टिव ट्रैकर में एक टैराबाइट की हार्ड डिस्क लगी है, जो एक वर्ष का रिकॉर्ड रखने में सक्षम है। अल्ट्रासाउंड होने के साथ ही पूरा वीडियो डिवाइस में चला जाएगा। डिवाइस अल्ट्रासाउंड की पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगी। स्वास्थ्य विभाग जब चाहेगा तब अल्ट्रासाउंड मशीन में लगी डिवाइस से रिकॉर्ड लेकर अल्ट्रासाउंड की जांच कर सकेगा। भ्रूण लिंग जांच को रोकने में डिवाइस कारगर होगी।