हल्द्वानी। शिक्षा विभाग को अपने विद्यालयों में अध्ययनरत करीब आठ लाख बच्चों की याद अब आई है। इन छात्रों के लिए 60 लाख किताबें छपवाने को ई निविदा जारी की गई है जो कि 27 मार्च को खुलेगी। नए शिक्षा सत्र के शुरू होने से मात्र एक सप्ताह पूर्व निविदा जारी करने से विभाग की मंशा पर भी सवाल उठ खडे़ हुए हैं। निजी स्कूलों के लिए एनसीईआरटी की किताबें उपलब्ध कराने के फेर में सरकार अपने ही विद्यालयों को भूल गई। विभाग ने पहले हल्द्वानी के दीपक प्रिंटर्स को एनसीइआरटी की 220 प्रकार की करीब 20 लाख किताबों को छापने का आर्डर दिया था।
प्रदेश के सरकारी प्राइमरी और जूनियर हाइ स्कूलों में एससीइआरटी की पुस्तकें ही चलती थीं। कक्षा नौ से 12 तक कक्षाओं में एनसीइआरटी पुस्तकें लागू थीं। शिक्षामंत्री अरविंद पांडेय ने इस बार नये सत्र से सभी में एनसीइआरटी पुस्तकों से पढ़ाई कराने का फैसला किया । पब्लिक स्कूल की एनसीइआरटी पुस्तक केवल अंग्रेजी माध्यम और सरकारी स्कूल की एनसीइआरटी पुस्तक हिंदी माध्यम की होगी।
सरकार ने सर्व शिक्षा अभियान के तहत नि:शुल्क पुस्तक देने के स्थान पर इस वर्ष से बच्चों को स्वयं किताबें खरीदने के लिए पैसा देने की योजना लागू कर नि:शुल्क किताबें नहीं छपवाई। अब बच्चों को बाजार से किताबें उपलब्ध हो सकें इसके लिए किताबें छापने का टेंडर निकाला गया है। इस प्रक्रिया के पूरा होने तथा बाजार में किताब छपकर पहुंचने में ही करीब तीन माह का समय लग जाएगा।
सरकारी विद्यालयों के बच्चों के लिए छपेंगी 60 लाख किताबें
शिक्षा विभाग ने जारी की निविदा
- सर्व शिक्षा अभियान के तहत कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को नि:शुल्क किताबें देने की योजना इस बार बंद कर दी गई है। प्राइमरी और जूनियर हाइ स्कूल के करीब सात लाख और कक्षा नौ से 12 तक के करीब एक लाख विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में एनसीइआरटी किताबें छापने के लिए विभाग की ओर से टेंडर निकाला गया है। इन किताबों के दाम एनसीइआरटी पुस्तकों से कम से कम दो - तीन रुपये कम होंगे। बाजार में किताबों की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी।
- जयप्रकाश यादव, संयुक्त निदेशक (पाठ्य पुस्तक), शिक्षा निदेशालय देहरादून