नैनीताल। बागेश्वर में ट्रामा सेंटर और रक्त बैंक के संचालन के मामले में उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। मंगलवार को न्यायालय ने आदेश दिया कि 11 दिसंबर तक इन दोनों के संचालन का संतोषजनक शपथ पत्र दाखिल नहीं किया गया तो स्वास्थ्य विभाग के सचिव सहित सभी राजपत्रित अधिकारियों का दिसंबर का वेतन रोक लिया जाए।
वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। नागरिक मंच बागेश्वर ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि बागेश्वर जिला मुख्यालय में स्वास्थ्य सुविधाएं बहुत खराब है। यहां ट्रामा सेंटर स्थापित नहीं हो सका है और रक्त बैंक जैसी आवश्यक सुविधा भी नहीं है। दूरस्थ क्षेत्रों में दुर्घटना होने पर प्रभावित लोगों को अस्पताल से जिले से बाहर दूसरे स्थानों पर ले जाना पड़ता है। याचिका में कहा गया कि इस संबंध में सरकार को कई बार प्रत्यावेदन दिए गए लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई। न्यायालय ने 10 नवंबर 2016 को निर्देश जारी किए थे कि सरकार चार सप्ताह के भीतर रक्त बैंक और ट्रामा सेंटर की स्थापना करें। न्यायालय ने इसकी जिम्मेदारी प्रदेश के स्वास्थ्य सचिव को दी थी। इस निर्देश का पालन नहीं हो सका। इस पर याची संगठन ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर वस्तुस्थिति की जानकारी दी। पक्षों की सुनवाई के बाद खंडपीठ ने कहा कि रक्त बैंक और ट्रामा सेंटर के संचालन का शपथ पत्र 11 दिसंबर तक न्यायालय में दाखिल किया जाए। शपथपत्र संतोषजनक नहीं पाया गया तो स्वास्थ्य विभाग के सचिव सहित सभी राजपत्रित अधिकारियों का दिसंबर का वेतन रोक लिया जाएगा।
बागेश्वर में ट्रामा सेंटर और रक्त बैंक के संचालन पर उच्च न्यायालय ने अपनाया सख्त रुख
11 दिसंबर तक शपथ पत्र दाखिल करने को कहा शपथ पत्र संतोषजनक न हुआ तो रुकेगा दिसंबर का वेतन