हल्द्वानी। राज्य सहकारी बैंक में बैंक के विशेष खाते से नौ लाख रुपये निकालकर आरटीजीएस करने का मामला एक बड़े घपले की ओर इशारा कर रहा है। आठ सितंबर को बैंक के विशेष खाते से नौ लाख रुपये निकाले गए थे। इतने दिन बीतने केबाद भी इन नौ लाख रुपयों को बैंक को वापस कराने की कोई कोशिश नहीं की गई। बताया तो यहां तक जा रहा है कि विशेष खाते से पैसे निकाल किसी दूसरे खाते में हस्तांतरित करने का खेल लंबे समय से खेला जा रहा है।
बैंक के अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक बैंक कर्मचारी के नाम से खोले गए इन खातों को कुछ समय बाद बंद कर दिया जाता है और फिर नए खाते खोल दिए जाते हैं। देवेंद्र दानू भी यही करता रहा है। जाहिर है कि बैंक के अधिकारियों की जानकारी के बिना यह संभव नही है। अब देवेंद्र दानू के खाते से नौ लाख रुपये का आरटीजीएस फेल होने के बाद यह राज खुलकर सामने आया है। बताया जा रहा है कि देवेंद्र ने बैंक के जिस खाते से नौ लाख रुपये निकाले हैं, वह जिला सहकारी बैंकों को उनकी जमा पूंजी पर ब्याज अदा करने वाला खाता है। अब सवाल यह भी उठ रहा है कि आठ सितंबर को यह अधिकारियों के संज्ञान में आ गया था कि बैंक के विशेष खाते से पैसे निकाले गए और फिर उन पैसों का आरटीजीएस किया गया। इसके बाद भी इतने लंबे समय तक कोई कार्यवाही नहीं की गई। मामले को दबाने की कोशिश में दानू पर दबाव पड़ा तो उसने टांडा के जंगल में जाकर जहर पी लिया। अब देवेंद्र के जरिए सारे खेल का राज खुलने की आशंका से घबराए बैंक के उच्चाधिकारी किसी तरह से मामले को दबाने की कोशिश में है। बैंक के प्रबंध निदेशक मामले की जानकारी न होने की बात कह रहे हैं और बैंक अध्यक्ष इस मामले को प्रबंध निदेशक के पाले में सरका दे रहे हैं। बैंक सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि इन्हीं सब अनियमितताओं को सामने न आने देने के लिए विशेष ऑडिट से भी बचा जा रहा है। शासन स्तर पर एक बार बैंक के विशेष ऑडिट की तैयारी भी कर ली गई थी।
राज्य सहकारी बैंक में लंबे समय से जारी है एक ही कर्मी के नाम कई खातों का खेल
आठ सितंबर को मामला सामने आने के बाद भी साधे हुए हैं चुप्पी
लंबे समय से खेला जा रहा है यह खेल, विशेष आडिट से कतरा रहा है बैंक