रानीखेत (अल्मोड़ा)। प्राथमिक विद्यालय रधुलीपीपल को अम्याड़ी प्राथमिक विद्यालय में मर्ज करने की सुगबुगाहट का अभिभावकों ने विरोध शुरू कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि अम्याड़ी की दूरी गांव से चार किमी है, जंगल का रास्ता होने के कारण हमेशा वन्य जीवों का खतरा बना रहता है। कहा कि इस प्राचीन विद्यालय से पढ़कर लोग पद्म श्री पुरस्कार तक प्राप्त कर चुके हैं। मालूम हो कि प्रख्यात कैंसर रोग विशेषज्ञ स्व. डा. एमसी पंत ने भी इसी विद्यालय से प्राथमिक शिक्षा ग्रहण की थी।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट सहित तमाम विभागीय अधिकारियों को भेजे ज्ञापन में ग्रामीणों का कहना है कि रधुलीपीपल में प्राथमिक विद्यालय की स्थापना 1955 के आस पास हुई थी, तब ग्रामीणों ने श्रमदान कर इसमें सहयोग किया था, लेकिन विभाग अब इस प्राचीन विद्यालय को बंद कर यहां अध्ययनरत बच्चों को चार किमी दूर अम्याड़ी प्राथमिक विद्यालय में मर्ज कराना चाह रहा है, जो कि सरासर गलत निर्णय है।
कहा कि रधुलीपीपल से अम्याड़ी की दूरी चार कमी है। जंगल का रास्ता है और यहां आए दिन तेंदुए का खतरा बना रहता है। बीच में बड़ा नाला पड़ता है, बरसात में कभी भी दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। जिस कारण अभिभावक भी बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। ज्ञापन भेजने वालों में पीटीए अध्यक्ष मुन्नी देवी, जीवन सिंह नेगी, मंजू देवी, लीला देवी, गिरीश चंद्र, गणेश चंद्र, माया देवी, कमलेश कुमार पंत, दीपक चंद्र, प्रेमा देवी सहित तमाम अभिभावक शामिल हैं। बीईओ एचआर राजन ने बताया कि 10 से कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों की सूची मांगी गई थी, सूची शासन को भेजी गई है, जो कि वहां विचाराधीन है। फिलहाल अभी इस पर कोई भी फैसला नहीं हुआ है।