हल्द्वानी। मदरसा छात्रों के लिए इंटरमीडिएट में प्रवेश की राह खुल गई है। शिक्षा महानिदेशक के निर्देश पर विद्यालयी शिक्षा परिषद ने सभी जिलों के मुख्य शिक्षा अधिकारियों को मदरसा छात्र-छात्राओं को प्रवेश देने संबंधी पत्र जारी कर दिए हैं। अब प्रदेश के शासकीय, अशासकीय इंटर कॉलेजों में मदरसा छात्र शिक्षा हासिल कर सकेंगे।
मदरसा शिक्षा परिषद के तहत मुंशी/मौलवी (समकक्ष हाईस्कूल), आलिम (इंटर), कामिल (स्नातक) और फाजिल (परास्नातक) की परीक्षा कराई जाती है। वर्ष 2013 में गठन के बाद से अब तक करीब 20 हजार छात्र-छात्राएं मदरसा शिक्षा परिषद में पंजीकृत हो चुके हैं। समकक्षता की मान्यता न मिलने की वजह से उन्हें स्कूलों और कॉलेज में प्रवेश नहीं मिल पा रहा था। बीते दिनों अमर उजाला ने इस मामले को ‘बिना मान्यता की डिग्रियां बांट रहा मदरसा बोर्ड’ शीर्षक से प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद मदरसा बोर्ड ने शासन से अनुरोध किया। मदरसा इशाअत-उल-हक के प्रबंधक उवैस खान ने बताया कि हमारी कोशिश है कि मदरसे के छात्र-छात्राएं पीएचडी और नेट की परीक्षा में भी बैठे, इसके लिए लगातार पत्राचार किया जा रहा है। उम्मीद है कि जल्द शासन स्तर से इस पर मुहर लग जाएगी।
मदरसा बोर्ड की डिग्रियों की समकक्षता का मामला शासन में विचाराधीन है। छात्र-छात्राओं को स्कूलों में प्रवेश में दिक्कतें आ रही थीं। उनके भविष्य को देखते हुए सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि प्रदेश के शासकीय, अशासकीय विद्यालयों में मदरसा छात्रों को प्रवेश दिया जाए।
-डॉ. नीता तिवारी, सचिव, विद्यालयी शिक्षा परिषद रामनगर