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उच्चशिक्षा: चहेतों को फिट करने को सुगम - दुर्गम में खेल

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हल्द्वानी। राजकीय महाविद्यालयों के सुगम-दुर्गम निर्धारण के मामले में उच्चशिक्षा निदेशालय सवालों में घिर गया है। सुगम दुर्गम का निर्धारण तीन बार करने के बावजूद जिला मुख्यालय के महाविद्यालय दुर्गम श्रेणी में अंकित कर दिए गए हैं।
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स्थानांतरण एक्ट के तहत उच्चशिक्षा निदेशालय ने पिछले दिनों महाविद्यालयों के सुगम दुर्गम निर्धारण की सूची जारी की थी। अब इसी के आधार पर प्राचार्यों, प्राध्यापकों और कर्मचारियों के तबादले की तैयारी चल रही है। निदेशालय के जानकार सूत्रों की मानें तो महाविद्यालयों के सुगम दुर्गम निर्धारण में चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए घालमेल किया गया है। कुमाऊं का प्रवेश द्वार हल्द्वानी एवं टनकपुर और गढ़वाल का प्रवेश द्वार कोटद्वार, देहरादून एवं ऋषिकेश माना जाता है। उच्चशिक्षा निदेशालय के अधिकारियों ने कुमाऊं और गढ़वाल के प्रवेश द्वार से 30 से 40 किलोमीटर दूर स्थित कालेजों को दुर्गम श्रेणी में घोषित कर दिया है जबकि कुमाऊं और गढ़वाल के प्रवेश द्वार से 250 से 300 किलोमीटर दूर पर्वतीय क्षेत्रों में स्थित कॉलेजों को भी इसी श्रेणी में माना है। चंपावत जिले के अमोड़ी कॉलेज और नैनीताल के दोषापानी कॉलेज दुर्गम हैं। अमोड़ी, लोहाघाट, चंपावत दुर्गम हैं तो धारचूला और मुनस्यारी के कॉलेज भी दुर्गम माने गए हैं। इसी तरह गढ़वाल में जयहरीखाल दुर्गम श्रेणी में रखा गया है तो दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्र के जोशीमठ, नागनाथ पोखरी, त्यूनी और बड़कोट कालेज भी इसी श्रेणी में हैं। जिला मुख्यालय में स्थित महाविद्यालय दुर्गम घोषित किए जाने के निर्णय पर कई प्राध्यापकों ने सवाल उठाए हैं। रानीखेत और उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण भी दुर्गम में शामिल की गई है।
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