हल्द्वानी। उत्तराखंड मुक्त विवि के पास वन भूमि में अंतरराज्यीय बस अड्डे बनाने को लेकर नौ साल पहले भी कवायद हुई थी। भारत सरकार की टीम ने इसका निरीक्षण किया और खैर के जंगल का हवाला देते हुए जमीन देने से इंकार कर दिया था। इसी जमीन को उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय को भी नहीं लेने दिया गया। मामले की संवेदनशीलता को देख अब वन विभाग के अधिकारी कुछ भी कहने को तैयार नहीं हैं।
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक 2007 में कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद पूर्व वित्त मंत्री इंदिरा हृदयेश की पहल पर हल्द्वानी में अंतरराज्यीय बस अड्डा बनाने के लिए जिला प्रशासन ने तेजी दिखाई थी। 2009 में तत्कालीन जिलाधिकारी हरिताश गुलशन ने तीनपानी के पास मुक्त विवि के समीप जंगल में अंतरराज्यीय बस अड्डा बनाने का प्रस्ताव बनाकर वन विभाग को भेजा। केंद्र व प्रदेश में कांग्रेस की सत्ता होने पर जल्द ही भारत सरकार से आईएफएस वाईकेएस चौहान के नेतृत्व में टीम सर्वे करने पहुंची।
टीम ने मौके पर पाया कि उक्त भूमि में खैर के पेड़ हैं और खैर के दुर्लभ प्रजाति में आता है। 20-25 हेक्टेयर वन भूमि में भारी संख्या में खैर के पेड़ काटे जाते इसलिए टीम ने इस भूमि को देने से इंकार कर दिया था। इसी जमीन को अब भाजपा ने फिर अंतरराज्यीय बस अड्डे के लिए प्रस्तावित किया है।
2009 में ही वन विभाग ने इस जमीन को उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय को देने से भी इंकार किया था। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के लिए 43 हेक्टेयर का प्रस्ताव बनाया गया था। मुक्त विश्वविद्यालय को केवल 13 हेक्टेयर जमीन ही दी गई। उस समय भी कहा गया कि खैर का पूरा जंगल साफ हो जाएगा। अब हालांकि वन विभाग के अधिकारियों के सुर भी बदले हुए हैं। वन संरक्षक पराग मधुकर धकाते का कहना है कि प्रस्ताव के सामने आने पर ही कुछ कहा जा सकता है।
गौलापार में भाजपा का था प्रस्ताव, कांग्रेस ने जताया था विरोध
गौलापार में बस अड्डा बनाने का विरोध पूर्व में कांग्रेस ने भी किया था। पूर्व में परिवहन मंत्री रहते हुए गौलापार में बस अड्डा बनाने का प्रस्ताव कालाढूंगी विधायक बंशीधर भगत के समय आया था। उस समय उद्घाटन समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक और पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी भी आए थे। उस समय युवक कांग्रेस ने विरोध जताया था और इस विरोध प्रदर्शन में लाठीचार्ज तक हुआ था।