हल्द्वानी। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में अगले सत्र से भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित विषयों का संचालन होगा। इसके लिए नई विद्याशाखा का गठन किया जाएगा। स्नातकोत्तर में भारतीय ज्ञान परंपरा के तहत पढ़ाए जाने वाले विषयों की अनिवार्यता होगी।
यूओयू में मंगलवार को एक्सपर्ट कमेटी की बैठक के बाद भारतीय ज्ञान परंपरा में विभिन्न विभागों के तहत 26 विषयों को संचालित करने पर सहमति बनी। बोर्ड बैठक के बाद इसका सिलेबस तैयार किया जाएगा। सत्र 2025-26 से इसे एमए, एमएसी, एमकॉम में लागू किया जाएगा। निदेशक अकादमिक प्रो. पीडी पंत ने बताया कि नए सत्र से विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा की पढ़ाई होगी। एक्सपर्ट कमेटी ने इसके लिए 26 विषयों का चयन किया है। स्नातकोत्तर में छात्र-छात्राओं को इसमें से भी एक विषय लेना होगा। उन्होंने बताया कि भारतीय ज्ञान परंपरा में आधुनिक पीढ़ी के युवाओं को देश की पुरानी ज्ञान परंपरा से अवगत कराया जाएगा। बैठक में डा. एमएम जोशी और ऑनलाइन माध्यम से जेएनयू से प्रो. हरिमन तिवारी, मनोज शर्मा, प्रो. जीडी शर्मा हिमाचल विश्वविद्यालय, प्रो. गुरमीत सिंह, प्रो. ओपी सिंह, रविंद्र कुमार आदि जुड़े।