विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगने से ठीक 15 दिन पहले जिन खनन कारोबारियों पर तत्कालीन राज्य सरकार मेहरबान हो गई थी अब उन पर तलवार लटक गई है। सरकार बदलने पर अब उन्हें दी गई अनुमति को निलंबित कर दिया गया है।
इसके तहत कुमाऊं के 16 स्टोन क्रशर, 25 खड़िया खदान, चार खनन पट्टे और दो स्क्रीनिंग प्लांट को बंद करने आदेश जारी किए जा रहे हैं। अब शासन से गठित कमेटी 30 दिन में इनकी जांच कर रिपोर्ट भेजेगी।
मुख्य सचिव एस रामास्वामी की ओर नौ मई को जारी आदेश में कहा गया है कि राज्य में आदर्श आचार संहिता प्रभावी होने की तारीख से 15 दिन पहले जिन स्टोन क्रशर, स्क्रीनिंग प्लांट, मोबाइल स्टोन क्रशर, हाट मिक्स प्लांट और खनन पट्टों को अनुमति दी गई थी उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।
इनकी जांच के परीक्षण के लिए एक समिति भी गठित की गई है। समिति का अध्यक्ष औद्योगिक विकास विभाग (खनन) के सचिव को बनाया गया है। जबकि मुख्य वन संरक्षक मुख्यालय देहरादून और केंद्रीय मृदा व जल संरक्षण अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान के वैज्ञानिक को सदस्य बनाया गया है।
शासन ने चुनाव आचार संहिता से 15 दिन पहले दी गई अनुमति को रद्द कर दिया है। इस आदेश की जद में कुमाऊं के 16 स्टोन क्रशर, 25 खड़िया खदान, चार खनन पट्टे और दो स्क्रीनिंग प्लांट आ रहे हैं। इन्हें बंद करने आदेश जारी किए जा रहे हैं।
- राजपाल लेघा उपनिदेशक खनन