हल्द्वानी। खनन के खेल में गौला नदी का चेहरा ही बिगाड़ दिया गया है। आरबीएम (रेता, बजरी) खत्म होने के बाद भी कई गेटों पर खनन जारी है। हाल यह है कि डेढ़ मीटर तक की खुदाई करने के मानक को ताख पर रखकर पांच मीटर तक खुदाई कर दी गई है। इसकी वजह से गौला में पुरानी दिल्ली के किले की दीवारों जैसी मिट्टी की दीवारें बन गई हैं।
केंद्र की शर्त के मुताबिक गौला नदी में अधिकतम 54.25 लाख घन मीटर आरबीएम की निकासी निर्धारित की है। यह निकासी शीशमहल से शांतिपुरी तक 11 गेटों से निकासी होती है। एक अक्टूबर से 31 मई तक खनन सत्र चलता है। मई के पहले हफ्ते में कई गेटों से आरबीएम खत्म हो चुका है। इंदिरा नगर, आंवला चौकी गेट, गोरा पड़ाव समेत कई गेटों पर आरबीएम खत्म होने के बाद मिट्टी खोदी जा रही है।
यह खनन भी इतना अवैज्ञानिक ढंग से किया गया है नदी की हालत बदतर हो गई है। इंदिरा नगर गेट पर ही जगह-जगह नदी तल पर चार-पांच मीटर ऊंची दीवारें बन गई हैं। वन, वन निगम आंख मूंदने को ही बेहतर मान रहा है। सूत्रों की मानें तो आंवला चौकी गेट और गोरापड़ाव के डंपर स्वामी लालकुआं में खनन के लिए घुस रहे हैं।
ये हैं मानक
= नदी तल से सिर्फ 1.5 मीटर तक ही खुदान किया जाएगा
= नदी के दोनों ओर 25-25 फीसदी इलाका छोड़ा जाएगा
= नदी में इस तरह खनन किया जाएगा ताकि पानी के लिए एक रास्ता निर्धारित हो
खनन सत्र खात्मे की कगार पर, नहीं मिली आकलन रिपोर्ट
एक अक्तूबर से 31 मई तक का खनन सत्र खत्म होने की कगार पर है। अभी तक केंद्रीय मृदा एवं जल संरक्षण की रिपोर्ट नहीं मिली है। यह रिपोर्ट बताती है कि नदी में कुल कितना उप खनिज अब बचा हुआ है। इसी आधार पर फैसला लिया जाता है।
अभी केंद्रीय मृदा जल संरक्षण संस्थान की रिपोर्ट नहीं मिली है। गेटों पर माल का जायजा लेकर ही आगे का फैसला किया जाएगा।
-एमपीएस रावत, आरएम, वन विकास निगम
कई गेटों पर आरबीएम खत्म, फिर भी जारी है खनन, 1.5 मीटर तक खुदाई मान्य, खोद डाला 5-5 मीटर