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खजाना खाली, कहां से चुकाए बकाएदारी

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हल्द्वानी। स्वास्थ्य सेवाओं का हाल बेहाल है। खाली खजाने के चलते सुशीला तिवारी अस्पताल की व्यवस्थाएं लड़खड़ा सकती हैं। सुशीला तिवारी अस्पताल पर तीन करोड़ रुपये से अधिक की उधारी हो चुकी है। उधार चुकाने के लिए फिलहाल पैसा नहीं है।
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गोरखपुर में आक्सीजन सिलेंडर न होने के कारण कई बच्चों की मौत हो गई थी। गोरखपुर की घटना के बाद भी शासन-प्रसाशन की नींद नहीं टूट रही है। सुशीला तिवारी अस्पताल में आक्सीजन सिलेंडर की सप्लाई करने वाली कंपनी का लगभग 75 लाख रुपये बकाया हो गया है। इसके अलावा दवा सप्लाई कंपनी के भी लाखों रुपये बकाया है। एमआरआई की सीएमसी कराने और अन्य मशीनों के रखरखाव के लिए भी धनराशि की दरकार है। राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉॅ. सीपी भैसोड़ा ने बताया कि आक्सीजन कंपनी वाले के 75 लाख रुपये देने है। कंपनी के लोग बकाया अदा करने के लिए कई बार मौखिक रूप से कह चुके हैं। दवा कंपनी के लोग भी तगादा कर रहे हैं। सभी को आश्वासन दिया गया है कि एक महीने के भीतर भुगतान कर दिया जाएगा।

दो साल से लगी है यूजर चार्ज पर रोक

सुशीला तिवारी अस्पताल में यूजर चार्ज के रूप में जमा होने वाली धनराशि के प्रयोग पर दो साल से रोक लगी हुई है। प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा ने बताया कि एक महीने में यूजर चार्ज के रूप में 50 लाख से 70 लाख रुपये की धनराशि जमा होती है। उन्होंने बताया कि यूजर चार्ज में लगभग 10 से 15 करोड़ रुपये जमा होगा। तत्कालीन चिकित्सा-शिक्षा सचिव ओमप्रकाश ने आश्वासन दिया था कि जल्द ही यूजर चार्ज पर लगा प्रतिबंध हटा दिया जाएगा। इस बीच सचिव बदल गए और अभी तक यूजर चार्ज पर लगा प्रतिबंध नहीं हटा है।
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