द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। तीन माह से दूध का भुगतान नहीं होने से दुग्ध उत्पादकों में आक्रोश पनपने लगा है, जिसके चलते उत्पादकों के सम्मुख आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। दुग्ध उत्पादक समितियों की बैठक में तय हुआ कि अतिशीघ्र उत्पादकों को भुगतान नहीं हुआ तो तीन जुलाई से आंदोलन शुरू किया जाएगा, यदि इसके बाद भी सार्थक कार्रवाई नहीं होने पर दूध की आपूर्ति बंद कर ही जाएगी।
दुग्ध उत्पादक विकास संगठन अध्यक्ष आनंद सिंह बिष्ट की अध्यक्षता में हुई बैठक में वक्ताओं ने कहा कि उत्पादकों को अप्रैल, मई और जून का भुगतान नहीं किया गया है। गुजर बसर के लिए दूध ही एकमात्र सहारा है, भुगतान नहीं होने के कारण परिवारों के सम्मुख गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। वक्ताओं ने कहा कि दुग्ध संघ द्वारा समय पर भुगतान नहीं करने और उचित मूल्य नहीं दिए जाने के चलते 73 समितियां पहले ही बंद हो चुकी हैं। बैठक में दूध का मूल्य 40 रुपये प्रति लीटर करने, एक साल के रुके हुए दूध के प्रोत्साहन राशि अविलंब देने, पशु आहार की कीमत पांच रुपये प्रति किलो करने, सचिवों को अतिरिक्त कार्यों का मानदेय दुग्ध उपार्जन के मानकों के अनुसार देने और अनावश्यक ठेके पर रखे गए श्रमिकों को हटाने की मांग भी उठाई गई। कहा कि दूध का भुगतान अविलंब नहीं किया गया तो तीन जुलाई से दुग्ध अवशीतन केंद्र चौखुटिया में आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा। इसके बाद दूध की सप्लाई पूरी तरह से बंद कर दी जाएगी। बैठक में खोलियाबांज, टोडरा, दुधोली, नायल, मटेला, सुरना, कुंथाड़ी, पान, भटकोट आदि संगठनों से जुड़े ब्रज मोहन फुलारा, मोहन सिंह कैड़ा, हीरा सिंह, प्रताप सिंह, दीप तिवारी, गोविंद प्रसाद, बहादुर सिंह सहित तमाम समितियों के सचिव मौजूद थे। बाद में दुग्ध विकास मंत्री डा. धन सिंह रावत, प्रधान प्रबंधक दुग्ध संघ और जिलाधिकारी को ज्ञापन भी भेजे गए।