शिप्रा नदी में डाला जा रहा घरों से निकलने वाला सीवर
भवाली (नैनीताल)।
नगर और आसपास के क्षेत्रों के कई घरों से सीवर और नालियों का पानी सीधे क्षेत्र की इकलौती उत्तर वाहिनी शिप्रा नदी में गिराया जा रहा है। इस कारण शिप्रा नदी भीषण प्रदूषण का शिकार हो गई है। यह स्थिति तब है जब पूर्व में तत्कालीन जिलाधिकारी ने शिप्रा नदी को प्रदूषित करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे। नदी दिन प्रति दिन प्रदूषित हो रही है लेकिन जिम्मेदार महकमे नदी को प्रदूषण से बचाने की दिशा में जरा भी गंभीर नहीं हैं।
पिछले काफी समय से यहां देवी मंदिर और रानीखेत रोड स्थित दर्जन भर से अधिक मकानों से सीवर और सोख्ता पिटों के पाइप लाइनों को सीधे शिप्रा नदी में खोल दिया गया है। इससे नदी में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। नदी में लगातार बढ़ते प्रदूषण के चलते पर्यावरणविद चिंतित हैं। उनका मानना है कि यदि शीघ्र नदी को प्रदूषण से नहीं बचाया गया तो निकट भविष्य में नगर और आसपास के क्षेत्रों में कभी भी संक्रामक रोग फैल सकता है।
शिप्रा नदी का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि नगर और आसपास के क्षेत्र के लोग इसे शवदाह स्थल के रूप में भी प्रयोग करते हैं और शवदाह के बाद इसी नदी के पानी से स्नान भी करते हैं। श्यामखेत से होकर आने वाली शिप्रा नदी में पड़ने वाला सीवर व अन्य कूड़ा कचरा शवदाह स्थल से होते हुए कैंची में बाबा नीम करौली महाराज के मंदिर तक पहुंचता है।
पिछले साल तत्कालीन डीएम दीपक रावत ने नगर पालिका के ईओ को नदी को प्रदूषित करने वालों का चालान करने के निर्देश दिए थे। तब पालिका ने कुछ लोगों का चालान कर पल्ला झाड़ लिया।
इस संबंध में पालिकाध्यक्ष नीमा बिष्ट ने कहा कि शिप्रा नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए सामूहिक सोख पिट बनवाने का प्रस्ताव शासन को भेजा जा रहा है। इसके अलावा नगर में सीवर लाइन बिछाने का प्रस्ताव भी शासन को भेजा गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि शीघ्र ही शिप्रा नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए ठोस पहल की जाएगी।
जगदीश नेगी ने उठाया सफाई का बीड़ा
बीते एक साल से नगारी गांव निवासी जगदीश नेगी ने शिप्रा नदी की सफाई का बीड़ा उठाया है। उन्होंने शिप्रा कल्याण समिति का भी गठन किया है। नेगी बताते हैं कि पिछले काफी समय से वह देवी मंदिर, रानीखेत रोड और दुग्ध डेयरी के समीप से शिप्रा में खुलने वाले सीवर के पाइपों को हटवाने की मांग करते रहे हैं लेकिन आज तक इस दिशा में किसी ने पहल नहीं की।