हल्द्वानी। अब 10 लाख से कम का सालाना कारोबार बताकर टैक्सी वाहन जीएसटी चुकाने से बच नहीं पाएंगे। जीएसटी नियमों के अनुसार प्रदेश के बाहर सेवा देने वाले हर टैक्सी वाहन को जीएसटी में पंजीयन लेना और कर चुकाना अनिवार्य है।
जिले में 1,000 से ज्यादा टैक्सी वाहन (बस, टैक्सी, मैक्सी, कैब) संचालित होती हैं। जीएसटी में पंजीयन की शर्त होती है कि सेवा या माल के एवज में सालाना 10 लाख का टर्न ओवर होना चाहिए। ये टैक्सियां सालाना 10 लाख से कम आय बता कर जीएसटी में पंजीकृत नहीं होती है। इससे इनसे 18 फीसदी मिलने वाला कर नहीं मिल पाता है। अब 10 लाख सालान टर्न ओवर का बहाना नहीं चलेगा। राज्य कर अधिकारियों ने भी टैक्सी में चलने वाले वाहनों का चिन्हिकरण करना शुरू कर दिया है। यदि सभी ट्रैवल्स, टैक्सी वाहनों से 18 फीसदी की दर से कर मिलना शुरू हो गया तो राजस्व में भारी बढ़ोत्तरी होगी।
आरटीओ से जुटाया जा रहा है डाटा
राज्य कर विभाग ने परिवहन विभाग से आल इंडिया परमिट वाले वाहनों की सूची मांगी है। इस सूची के आधार पर वाहन स्वामियों को चिन्हित कर नोटिस भेजे जाएंगे।
15 ट्रैवल्स संचालकों को जारी हुए नोटिस
राज्य कर विभाग ने हिना ट्रैवल्स, अनामिका टूर एंड ट्रैवल्स, वाईटीडीओ टूर एंड ट्रैवल्स, सिटी हार्ट टूर एंड ट्रैवल्स, कुर्मांचल टूर एंड ट्रैवल्स समेत 15 ट्रैवल संचालकों को नोटिस भेजे हैं।
ट्रैवल संचालकों को नोटिस भेजे गए हैं। साथ ही आरटीओ से आल इंडिया परमिट वाले वाहनों का डाटा मांगा गया है। प्रदेश के बाहर चलने वाले वाहनों को भी जीएसटी देना होगा।
-जेपी डुंगरियाल, संयुक्त आयुक्त, राज्य कर