हल्द्वानी। एचएमटी रानीबाग के 190 कर्मियों पर छंटनी की तलवार लटक रही है। एचएमटी में कार्यरत 503 कर्मियों में 313 ने वीआरएस के लिए आवेदन कर दिया है। लगभग 110 कर्मियोें को प्रबंधन ने रिलीव कर दिया है। हालांकि कुछ यूनियनों ने वीआरएस की आवेदन तिथि बढ़ाने और कर्मियों को 30 वर्ष के सेवाकाल का लाभ देने संबंधी मांग की है।
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली आर्थिक सुधार समिति ने एचएमटी रानीबाग की बंदी पर मोहर लगा दी थी। तमाम प्रयासों के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकला। एचएमटी प्रबंधन ने वीआरएस/वीएसएस की तिथि 19 मार्च से बढ़ाकर 31 मार्च कर दी थी।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रबंधन ने अपने स्तर से वीआरएस की तारीख बढ़ाते हुए 04 अप्रैल कर दी थी। फैक्ट्री में कार्यरत लगभग 503 कर्मियों में 313 कर्मियों ने वीआरएस/वीएसएस के लिए आवेदन किया। बताया जा रहा है कि कुछ यूनियन के पदाधिकारियों ने भी आवेदन कर दिया है।
190 कर्मचारी ऐसे हैं जिन्होंने आवेदन नहीं किया है। प्रबंधन ने अब आवेदन की प्रक्रिया बंद कर दी है और तिथि भी नहीं बढ़ाई है। सूत्रों की मानें तो कुछ यूनियन के पदाधिकारियों ने समयावधि बढ़ाने और कर्मियों को 30 वर्ष की सेवाकाल के बराबर लाभ देने की मांग की है।
इस संबंध में भारी उद्योग मंत्रालय से लेकर प्रबंधन के उच्चाधिकारियों को पत्र भेजे हैं मगर कोई जवाब नहीं आया है। प्रबंधन औद्योगिक विवाद अधिनियम के तहत 190 कर्मियों के खिलाफ छंटनी की कार्रवाई कर सकता है। बुधवार को प्रबंधन ने लगभग 35 कर्मियों को रिलीव किया था, शेष लगभग 75 कर्मी रिलीव होने की प्रक्रिया में हैं।