हल्द्वानी। लामाचौड़ स्थित एमआईईटी कुमाऊं कॉलेज में सतत विकास के लिए ‘कृषि विज्ञान, स्टैम और स्वास्थ्य में उभरते रुझान’ विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शोधार्थियों के 307 शोध पत्रों को शामिल किया गया है। पहले दिन कृषि, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी पर पेश किए गए 183 शोध पत्रों पर चर्चा की गई।
उत्तराखंड विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र (यूएसर्क) के सहयोग से आयोजित सम्मेलन का मुख्य अतिथि सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा के वाइस चांसलर डॉ. सतपाल सिंह बिष्ट, विशिष्ट अतिथि उत्तराखंड बायोटेक्नोलॉजी काउंसिल के निदेशक डॉ. संजय कुमार, मुख्य वक्ता यूओयू के पूर्व निदेशक एवं रजिस्ट्रार डॉ. आरसी मिश्रा, डॉ. पीडी पंत, इनोवेशन लीड अटल इनोवेशन मिशन नीति आयोग के सोहेल शेख, गवर्नमेंट पीजी कॉलेज बाजपुर के प्राचार्य डॉ. कमल के पांडेय, एमआईईटी कॉलेज के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. बहादुर सिंह बिष्ट, कार्यकारी निदेशक डॉ. तरुण सक्सेना, कॉन्फ्रेंस संयोजक एसीआईसी देवभूमि फाउंडेशन के सीईओ डॉ. कमल रावत ने संयुक्त रूप से कार्यक्रम का उदघाटन किया। इस मौके पर शोधपत्र कॉन्फ्रेंस पुस्तिका का विमोचन भी किया गया।
पहाड़ी कृषि के लिए ठोस नीति बनाने पर जोर
सम्मेलन के दौरान एसएसजे विवि के एसएसजे विवि के वाइस चांसलर ने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से मिट्टी की घटती उत्पादकता और पर्यावरण पर इसके प्रभाव प्रकाश डाला। उन्होंने सतत कृषि के महत्व पर जोर देते हुए पहाड़ी कृषि के लिए ठोस नीतियों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को रोजगार सृजन का साधन मानते हुए इसे अवसर के रूप में देखने की बात कही।