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विकास की उम्मीद लिए डालते हैं वोट

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नैनीताल। चुनाव में गांव के विकास की उम्मीद के साथ वोट करते हैं, लेकिन पांच साल विकास का इंतजार करते हुए ही गुजर जाते हैं। यह कहना था नैनीताल विधानसभा के बजून और कोटाबाग ब्लॉक के घूघूखाम क्षेत्र में बने मतदान केंद्र में वोट डालकर आ रहीं महिलाओं और बुजुर्गों का।
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अमर उजाला की टीम ने बृहस्पतिवार को नैनीताल विधानसभा के दूरस्थ मतदान केंद्रों से वोट डालकर लौट रहे मतदाताओं से बात की। बजून क्षेत्र के प्राथमिक स्कूल मतदान केंद्र में नौ किमी दूर फगुनियाखेत और आठ किमी दूर बजून पटियाखन से पैदल चलकर वोट डालने पहुंचीं नंदी देवी, तारा देवी, बसंती देवी, ललिता देवी, हंसी देवी, शांति देवी, माधवी, गीता, विद्या, सरला देवी का दर्द सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और पानी की समस्या को लेकर था। अलबत्ता इतनी दूर आकर वोट डालने के बाद भी विकास को लेकर उनमें उम्मीदें थीं। बोलीं, पांच साल बाद चुनाव में एक बार फिर इन सभी समस्याओं से निजात मिलने और गांव के विकास की उम्मीद लेकर मतदान किया है। नैनीताल से बीस किमी दूर कोटाबाग ब्लॉक में आने वाले घूघूखाम क्षेत्र के पोलिंग बूथ से लौट रहे भोला सिंह (52), जय किशन (60), करम सिंह (60), चंदन सिंह (65) ने कहा कि उनका क्षेत्र पर्यटन के लिहाज से अहम है, लेकिन व्यवस्थाएं लचर हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और पानी की ठीक सुविधा नहीं है, जिसमें सुधार के लिए वोट किया है।



विकास की उम्मीद लिए डालते हैं वोट
बजून और कोटाबाग ब्लॉक के घूघूखाम क्षेत्र में मतदान कर लौट रहे मतदाताओं ने बयां किया दर्द


छह किमी दूर खुरियाखत्ता में वोट देने आए श्रीलंका टापू वाले
हल्द्वानी। लोकतंत्र की आस्था कोई श्रीलंका टापू के लोगों से सीखे। टापू में जाने के लिए न तो सड़क है, न बिजली। न ही स्कूल। इसके बाद भी यहां के लोग अपना सांसद चुनने के लिए छह किमी दूर बिंदुखत्ता में बने शहीद मोहन सिंह भैसोड़ा राजकीय इंटर कॉलेज खुरियाखत्ता में बनाए गए पोलिंग बूथ पहुंचे। 220 लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। केदार सिंह, हिमांशु देउपा, त्रिलोक सिंह, मनुली देवी, मीना देवी, देवकी देवी ने कहा कि टापू में एकमात्र स्कूल भी बाढ़ में बह गया, सड़क, बिजली नहीं पहुंची है। चिकित्सा सुविधा के लिए 15 किमी दूर लालकुआं आना पड़ता है।
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