हल्द्वानी। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में स्नातक और परास्नातक स्तर पर विज्ञान विषय संचालित किए जाने पर अब सवाल उठने लगे हैं। हाल यह है कि मुक्त विश्वविद्यालय द्वारा संचालित बीएससी और एमएससी पाठ्यक्रम ऐसे अध्ययन केंद्रों पर चलाए जा रहे थे जहां न लैब थी और न पढ़ाने के लिए शिक्षक। इन अध्ययन केंद्रों में नौ इंटर कॉलेज और निजी स्टडी सेंटर शामिल हैं।
यूजीसी ने मानकों की अनदेखी किए जाने के कारण ही मुक्त विश्वविद्यालय को नये सत्र से बीएससी और एमएससी पाठ्यक्रम चलाने की अनुमति प्रदान नहीं की। इधर, यूओयू फिर से इन पाठ्यक्रमों को पुन: संचालित करने की अनुमति हासिल करने के प्रयास कर रहा है। यूओयू की स्थापना 2005 में हुई थी। उस समय केवल बीए पाठ्यक्रम संचालित होता था। बाद में यूओयू में वर्ष 2010 में तत्कालीन कुलपति ने विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के मकसद से इतने नए पाठ्यक्रम शुरू किए कि छात्र संख्या तीन हजार से 30 हजार का आंकड़ा पार कर गई। बीएससी और एमएससी समेत कई पाठ्यक्रम संचालित किए जाने में मानकों की अनदेखी के कई बार सवाल उठे, पर कुछ नहीं हुआ। यूजीसी ने मुक्त विश्वविद्यालय को पिछले वर्ष जो दिशा निर्देश भेजे थे उसमें भी साफ कहा गया था कि अध्ययन केंद्र सिर्फ राजकीय महाविद्यालय या फिर विश्वविद्यालय से संबद्ध संस्थान में ही संचालित किए जा सकते हैं, इसके बावजूद मानक के विपरीत चल रहे अध्ययन केंद्रों को बंद नहीं किया गया। इंटर कॉलेजों और निजी केंद्रों पर बीएससी, एमएससी विषय चलते रहे। परीक्षा नियंत्रक प्रो. पीडी पंत का कहना है कि विज्ञान विषय के विद्यार्थियों के लिए डिग्री कॉलेज में दस दिन की वर्कशॉप कराई जाती है, जिसमें प्रैक्टिकल से संबंधित पूर्ण ज्ञान विषय विशेषज्ञों से दिलाने की व्यवस्था की जाती है।
यूओयू के पाठ्यक्रमों की मान्यता का मामला
यूजीसी के मानकों की हो रही थी अनदेखी
विज्ञान विषय में विद्यार्थियों की संख्या
- बीएससी द्वितीय एवं तृतीय वर्ष में अध्ययनरत हैं करीब 300 विद्यार्थी
- एमएससी भौतिक, रसायन और वनस्पति विज्ञान में अध्ययनरत हैं लगभग 1000 विद्यार्थी