हल्द्वानी। चावल मिलों के दबाव में जल्द खरीफ नीति में भारी फेरबदल देखने को मिल सकता है। सरकार चावल मिलों को कमीशन एजेंट बनाने की तैयारी कर रही है। हो सकता है कि मिल परिसर में ही चावल मिलों को धान खरीदने की अनुमति भी मिल जाए।
चावल घोटाला सामने आने के बाद खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग की ओर धान खरीद नीति से कमीशन एजेंट को हटा लिया गया था। बाद में जब दोबारा नीति जारी की गई तो उसमें कमीशन एजेंट को शामिल कर लिया गया, लेकिन राइस मिलों को कमीशन एजेंट बनाने पर रोक लगा दी गई और कमीशन एजेंट का मंडी में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया गया। धान को मंडी में लाना भी अनिवार्य कर दिया गया था। इस कारण पिछले वर्ष चावल मिलें धान खरीद से पीछे हट गईं और धान खरीद न के बराबर हुई। इस कारण मिलों को भारी घाटा उठाना पड़ा। धान खरीद नीति बनने की सुगबुगाहट पर राइस मिलों ने दोबारा लॉबिंग शुरू कर दी है। सूत्रों की मानें तो 10 दिन पूर्व देहरादून में धान खरीद नीति को लेकर हुई बैठक में चावल मिलों को कमीशन एजेंट बनाने और उन्हें मिल परिसर में ही खरीद की अनुमति देन पर चर्चा भी हुई।
धान खरीद नीति बन रही है। बैठक में मिलों को कमीशन एजेंट बनाने पर चर्चा हुई थी। कमीशन एजेंट बनाने के सभी नियमों का पालन किया जाएगा। मिलों को परिसर में धान खरीदने की अनुमति देने में भी सभी नियमों का पालन किया जाएगा।
-आनंद वर्द्घन, प्रमुख सचिव खाद्य