हल्द्वानी। सरकारी स्कूलों में निशुल्क किताबों को खरीदने के लिए 46 लाख रुपये तो जारी किये गए लेकिन इन पैसों को छात्रों के खातों में हस्तांतरित करने का जिम्मा शिक्षकों के मत्थे मढ़ने की तैयारी है। अब शिक्षक कह रहे हैं कि पैसा ही हस्तांतरित करते रहें तो पढ़ाएगा कौन?
सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत शिक्षा विभाग की ओर से प्राइमरी और जूनियर हाइस्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को पहले निशुल्क पुस्तकें वितरित की जाती थीं। इस योजना को सरकार ने इस सत्र से बंद कर दिया है। सरकार ने पुस्तकों का पैसा सीधे बच्चों के बैंक खाते में भेजने की योजना डीबीटी शुरू की है। इस समय सरकारी स्कूलों के अध्यापक पठन-पाठन छोड़ बैंकों में बच्चों के खाते खुलवाने में लगे हैं। शासन का स्पष्ट आदेश है कि बच्चों के खाते में निशुल्क पुस्तकों का पैसा जिला कार्यालय से सीधे ट्रांसफर किया जाएगा। जिला कार्यालय ने अपना काम ब्लॉक पर डाल दिया। 46 लाख रुपये मिलने के बाद अब ब्लॉक शिक्षा कार्यालय अपनी परेशानी सीधे स्कूलों के अध्यापकों को देने की तैयारी में है।
निशुल्क पुस्तक योजना के तहत जिले को पहली किश्त के रूप में 46 लाख की धनराशि मिली है। इस धनराशि को ब्लॉक शिक्षा कार्यालयों को ट्रांसफर किया जाएगा। विद्यालयों को कक्षा एक से आठ तक बच्चों के बैंक खाते हर हाल में 16 अप्रैल तक खोलने के निर्देश दिए गए हैं ।
- केके गुप्ता, मुख्य शिक्षा अधिकारी नैनीताल