राज्य में दिव्यांगों के उत्थान के लिए उत्तराखंड सरकार केंद्र सरकार की तर्ज पर अलग दिव्यांग पुनर्वसन मंत्रालय बनाए। उत्तराखंड सरकार को चाहिए कि वह आरपीडब्ल्यूडी एक्ट 2017 को अमलीजामा पहनाए। यह बात नेशनल एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड इंडिया के अध्यक्ष और गुजरात सरकार के पूर्व निशक्तजन आयुक्त प्रो. भास्कर मेहता ने कही।
नैब गौलापार पहुंचे प्रो. मेहता ने अमर उजाला से बातचीत में दिव्यांगों के उत्थान के लिए खाका रखा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार को दिव्यांगों के लिए अलग रोजगार सेल बनाना चाहिए और उसे सक्रिय रखना होगा। प्रो. मेहता ने कहा कि समाज कल्याण विभाग को दिव्यांगों के लिए काम कर रहे एनजीओ को संसाधन उपलब्ध करवाने चाहिए।
इसके अलावा राज्य में दिव्यांगों के लिए सर्वश्रेष्ठ काम कर रहीं संस्थाओं और व्यक्तियों का चयन कर सम्मानित करने की व्यवस्था करनी चाहिए। ऐसी संस्थाओं का राष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाले पुरस्कारों के लिए भी अनुमोदन करना चाहिए।
युवा कल्याण विभाग को दिव्यांगों के लिए सांस्कृतिक, क्रीड़ा स्पर्धाओं का आयोजन करना चाहिए। इससे दिव्यांग समाज की मुख्य धारा से जुड़ सकेंगे। उन्होंने कहा कि दुर्घटनाओं के बाद हुए दिव्यांगों के लिए भी विशेष पुनर्वसन की व्यवस्था की जाए। इससे उनकी योग्यता और प्रतिभा का लाभ भी समाज को मिल सके। बहु दिव्यांगों के लिए भी अलग व्यवस्था की जानी चाहिए।
दिव्यांगों को ही बनाया जाए समितियों का प्रतिनिधि
प्रो. भास्कर मेहता ने कहा कि राज्य, मंडल, जिला या फिर ब्लॉक स्तर पर दिव्यांगों के लिए बनने वाली समितियों का प्रतिनिधि योग्य दिव्यांग को ही बनाया जाए। कहा कि दिव्यांग ही दिव्यांगों की समस्याओं को बेहतर तरीके से समझकर उन तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचा सकता है। राज्य में निशक्तजन आयुक्त भी योग्य दिव्यांग को बनाया जाना चाहिए।
शिक्षा योजनाओं में बनाया जाए अलग मद
प्रो. भास्कर मेहता ने कहा कि उत्तराखंड सरकार को गुजरात सरकार की तरह ही शिक्षा योजनाओं में अलग मद बनाने चाहिए। उन्होंने बताया कि गुजरात सरकार ने सर्व शिक्षा अभियान और रमसा के तहत दिव्यांगों के लिए अलग मद बनाया है।
उन्होंने गुजरात का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 1300 विशेष प्रशिक्षित शिक्षक काम कर रहे हैं। उत्तराखंड सरकार को भी ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए। ऐसे शिक्षकों को अन्य कार्यों से भी मुक्त रखा जाना चाहिए।