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18 बाघों की जिंदगी खतरे में

Wed, 23 Nov 2016 01:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो हल्द्वानी
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v - फोटो : amarujala
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बाघों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद लेने की कोशिश हो रही है। तमाम दावे किए जा रहे हैं, लेकिन वन महकमा बाघों की सुरक्षा के लिए कितना संजीदा है, वह बाघों से भरपूर हल्द्वानी वन प्रभाग और नंधौर अभ्यारण्य से समझा जा सकता है।
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जहां सुरक्षा और गश्त के सभी रास्ते बंद है। गश्त और चौकसी का आलम यह है कि अराजक तत्व आराम से जंगल में अवैध हथियार बना रहे हैं। ऐसी एक फैक्ट्री तक पकड़ी जा चुकी है।

वन विभाग ग्लोबल टाइगर फोरम के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मदद और संसाधन लेने की जुगत में भी हैं, लेकिन बाघों का मैनेजमेंट कितना बेहतर है, उसका अंदाजा हल्द्वानी वन प्रभाग से ही समझा जा सकता है।
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हल्द्वानी वन प्रभाग में 18 बाघ और दो शावक कैमरा ट्रैप में रिपोर्ट हो चुके हैं, इनकी संख्या और भी ज्यादा हो सकती है। बाघ के अलावा हाथी, लेपर्ड जैसी दूसरी संकटग्रस्त प्रजातियां भी हैं। सुरक्षा का आलम यह है कि आंवलाखेड़ा को जाने वाला महत्वपूर्ण मार्ग दो साल से बंद पड़ा है।

आखिरी बार अफसर द्वारा यहां का दौरा कब किया गया होगा, उनको भी याद नहीं होगा। दुर्गापीपल को जाने वाला रास्ता भी बंद पड़ा है। यही नहीं बरसात बीते महीनों हो चुके हैं, उसके बाद नंधौर वैली-जौलासाल-टनकपुर को जाने वाला सबसे महत्वपूर्ण रास्ता भी नहीं खुला।

इसी तरह सेनापानी-दुर्गापीपल का रास्ता भी महीनों से बंद है, जिसे देखने की फुर्सत महकमे को नहीं है। जौलासाल-तालबटिया से लेकर खोलगढ़ को जाने वाला मार्ग भी कब खुलेगा पता नहीं है। ऐसे में बाघों की सुरक्षा और गश्त कितनी हो पा रही होगी, खुद समझा सकता है।

इसका लाभ उठाकर ही जौलासाल के जंगल में अपराधियों ने अवैध हथियार बनाने की फैक्ट्री तक बना ली थी। इस घटना के बाद भी कोई बड़ा अफसर निरीक्षण करने तक नहीं पहुंचा था। डीएफओ डा. चंद्रशेखर सनवाल का कहना है कि बजट की दिक्कत केचलते मार्ग नहीं खुल सके।
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वन संरक्षक पश्चिमी वृत्त डा. पराग मधुकर धकाते का कहना है कि बजट की व्यवस्था हो गई है, इसी सप्ताह से मार्ग खोलने का काम शुरू हो जाएगा।
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