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जीते पार्षदों के बूते नगर निगम में भाजपा को घेरने की तैयारी

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हल्द्वानी। नगर निगम में विजयी रहे निर्दलीय पार्षदों के माध्यम से कांग्रेस ने नगर निगम बोर्ड में मजबूती के साथ जनसमस्याओं को उठाने और नगर निगम में भाजपा को घेरने की रूपरेखा बनानी शुरू कर दी है। निर्दलीय पार्षदों के स्वागत के लिए शुक्रवार को बुलाई गई बैठक में सदन में नेता प्रतिपक्ष और डिप्टी मेयर समेत कई मुद्दों पर चर्चा की गई। इस दौरान निर्दलीय पार्षदों से सदन के भीतर एकजुट रहने और विपक्षियों द्वारा दिए जाने वाले किसी भी तरह के लालच में न आने का आह्वान किया गया।
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अपने आवास में आयोजित बैठक में नेता प्रतिपक्ष डा. इंदिरा हृदयेश ने नवनिर्वाचित पार्षदों का स्वागत करते हुए सदन के भीतर होने वाले कामकाज की जानकारी दी और सदन के भीतर एकजुटता बनाए रखने को कहा। उन्होंने कहा कि भाजपा पार्षद बहुमत में नहीं हैं लिहाजा वह सदन के भीतर खुद को उपेक्षित न समझें बल्कि मजबूती के साथ विकास से जुड़े मुद्दों को उठाएं।
वक्ताओं ने विजयी पार्षदों से कहा कि हो सकता है कि डिप्टी मेयर अथवा किसी अन्य मामले में भाजपा उन्हें किसी तरह का लालच देकर अपने पक्ष में करना चाहे तो ऐसी स्थिति में वह किसी भी कीमत पर भाजपा के झांसे में न आएं। इस बैठक में कांग्रेसी नेता सुमित हृदयेश, पूर्व प्रधान मुकुल बल्यूटिया समेत नवनिर्वाचित पार्षद मोना शर्मा, नरेंद्र जीत सिंह कोहली, फईम जैबा सलमानी, मोहम्मद गुफरान, रवि जोशी, इस्लाम मिकरानी, जाकिर हुसैन, कुबरा बेगम समेत पूर्व पार्षद शकील सलमानी, अशरद व मोहम्मद साजिद समेत कई कांग्रेसी मौजूद थे।
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नगर निगम बोर्ड में भाजपा के केवल 20 पार्षद हैं जबकि शेष विजयी पार्षद कांग्रेस के हैं। कांग्रेस ने इस चुनाव में पार्षद पद के लिए सिंबल नहीं दिया था इसलिए उन्हें निर्दलीय कहा जा रहा है। उनके स्वागत के लिए बैठक बुलाई थी। बैठक में नेता प्रतिपक्ष के मुद्दे पर चर्चा हुई और उन्हें नगर निगम बोर्ड के कामकाज के बारे में बताया गया। -इंदिरा हृदयेश, नेता प्रतिपक्ष


अब कार्यसमिति के चुनाव पर लगी निगाहें
हल्द्वानी। नगर निगम के मेयर और पार्षदों के चुनाव हो चुके हैं। नये बोर्ड को शपथ भी अगले सप्ताह दिला दी जाएगी, इसके साथ अब बोर्ड में अति महत्वपूर्ण माने जाने वाले कार्यसमिति सदस्य पद के लिए जोड़तोड़ शुरू हो गई है। कार्यसमिति के लिए 12 सदस्यों का चुनाव होगा लेकिन इस चुनाव में सभी पदों पर पार्षदों को जिताने के लिए भाजपा के पास संख्या बल नहीं है। इसके लिए भाजपा को निर्दलियों का सहारा लेना पड़ सकता है। कार्यसमिति के पास बोर्ड की भांति ही विकास कार्यों के प्रस्ताव पारित करने का अधिकार होता है।
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