हल्द्वानी। अपने विष, आकार के कारण भय और कौतूहल बनने वाले किंग कोबरा की बीते कुछ सालों में 1800 से 2000 मीटर ऊंचाई वाले पहाड़ों में भी मौजूदगी देखी जा रही है। किंग कोबरा के बदलते रहन-सहन के बारे में जानने के लिए वन विभाग ने किंग कोबरा के शरीर पर माइक्रो चिप (रेडियो ट्रांसमीटर तकनीक) लगाकर उसके अध्ययन की योजना बनाई है।
किंग कोबरा कोल्ड ब्लडेड होता है। उसे तुलनात्मक तौर पर धूप की ज्यादा जरूरत होती है। पर बीते कुछ सालों से किंग कोबरा नैनीताल, रामगढ़, नथुवाखान जैसे सर्द इलाकों (1800 से 2000 मीटर की ऊंचाई) पर लगातार मिल रहा है। इसके मद्देनजर वन विभाग ने शुरुआती तौर पर पहाड़ों में किंग कोबरा के घोंसले (केवल किंग कोबरा ऐसा सांप है, जो घोंसले बनाकर अंडे देता है) पर कैमरे लगाकर उनके जन्म आदि के संबंध में जानकारी जुटाई है।
अब वन विभाग किंग कोबरा के व्यवहार, उसके मूवमेंट, वास स्थल आदि के बारे में और गहराई से जानना चाहता है। इसके लिए किंग कोबरा के शरीर पर माइक्रो चिप लगाकर अध्ययन की योजना बनाई है।
वनाधिकारियों के अनुसार चिप लगने के बाद किंग कोबरा के मूवमेंट एरिया का पता चलेगा। इसके साथ ही वह किस तरह के जंगल (वास स्थल) को ज्यादा पसंद करता है, उस जंगल की जैव विविधता कैसी है? उस जगह का तापमान कैसा रहता है समेत अन्य जानकारी पता चल सकेगी। साथ ही पहाड़ों में ऊंचाई के हिसाब से उनके व्यवहार में अगर कोई बदलाव आता है? तो वह भी जान सकेंगे।
वन विभाग ने वर्किंग प्लान में भी किया उल्लेख : डॉ. पाटिल
हल्द्वानी। वन संरक्षक (दक्षिणी वृत्त) डॉ. तेजस्वनी पाटिल के अनुसार किंग कोबरा सबसे सर्द इलाकों में रिपोर्ट हो रहा है। इसके अलावा किंग कोबरा के घोंसले चीड़ से लेकर ओक के जंगल तक में मिले हैं। अभी वन विभाग ने उनके घोंसले, सांपों के बच्चे के जन्म की रिकार्डिंग, उनके मिलने के स्थल समेत फोटोग्राफ जुटाए हैं। पर और अधिक जानकारी के लिए किंग कोबरा पर माइक्रो चिप लगाकर अध्ययन की योजना है। इसके लिए वर्किंग प्लान में भी उल्लेख किया गया है। यह अध्ययन किसी शोध संस्थान के सहयोग से करने की योजना है।
- वन विभाग की पहाड़ों में अध्ययन की तैयारी
- 1800 से 2000 मीटर की ऊंचाई पर किंग कोबरा की मिल रही मौजूदगी