हल्द्वानी। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) कार्निया, कटरेक्ट सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. जीवन सिंह तितियाल ने कहा के प्रदूषण, लैप टाप, मोबाइल, कंप्यूटर, टीवी आदि के चलते आंखों के ड्राई होने की समस्या लगातार बढ़ रही है। आंखों के ड्राई होने से केवल नेत्र संबंधी नहीं बल्कि नींद पर भी असर पड़ रहा है। ऐसे में डॉक्टरों केवल इलाज नहीं बल्कि लोगों को जागरूक करने की दिशा में भी काम करना होगा।
डॉ. तितियाल ने यह जानकारी मेडिकल कालेज के नेत्र रोग और देवभूमि आप्थामोलॉजी के सहयोग से आयोजित कार्यशाला में डॉक्टरों को दी। उन्होंने बताया कि एम्स में मोतियाबिंद का नई तकनीक से आपरेशन किया जा रहा है, इसमें तीन महीने की जगह व्यक्ति बमुश्किल दो सप्ताह में पूरी तरह सामान्य हो जाता है। उन्होंने डॉक्टरों को नई आई सर्जरी की तकनीक आदि के बारे में भी जानकारी दी। कार्यशाला में डॉ. जीएस तितियाल, डॉ. विमलेश शर्मा, डॉ. मयंक पांगती समेत बड़ी संख्या डॉक्टर मौजूद थे।
उत्तराखंड से आंखों में चोट और इंफेक्शन के पहुंच रहे रोगी
हल्द्वानी। डॉ. तितियाल ने बताया कि पहाड़ों से आंखों के चोटिल होने और इंफेक्शन के पांच से अधिक मामले एम्स में पहुंच रहे हैं। इनकी संख्या तुलनात्मक तौर पर बढ़ी है। यह रोगी तब पहुंचते हैं, जब स्थिति काफी गंभीर हो चुकी होती है। आंखों में फंगल इंफेक्शन के मामले भी पहुंच रहे हैं, इनको सामान्य तौर पर दवाओं से ठीक नहीं होते हैं।