हल्द्वानी। बेशक मॉल का निर्माण नक्शा स्वीकृत कर कराया जा रहा था लेकिन निर्माण के दौरान बरते जाने वाले सुरक्षा मानकों की कदम कदम पर धज्जियां उड़ाई गई थीं। इसी का नतीजा है कि तीन युवा मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई। आवास विकास ठंडी सड़क स्थित मिक्सचर प्लांट (घटना स्थल) पर जहां भारी भरकम कंटेनर रखा गया था वहां कंटेनर के नीचे नहीं बैठने, कंटेनर से दूर रहने संबंधी कोई भी चेतावनी बोर्ड नहीं लगाया गया था। आमतौर पर ऐसे स्थानों पर चेतावनी बोर्ड लगे होते हैं। इतना ही नहीं, इस तरह का हादसा होने पर कंटेनर को हटाने के लिए कोई भी उपकरण जैसे क्रेन का इंतजाम नहीं था। वहीं जब हादसा हुआ तो गार्ड ने घटना स्थल का गेट बंद कर दिया और चंद मजदूरों से कंटेनर में रखे 1200 सीमेंट के कट्टे हटवाने में डट गए। इससे तीन-चार घंटे लग गए। यदि गेट खोलकर जनता की मदद ली जाती तो कंटेनर से जल्दी कट्टे निकाले जा सकते थे। वहीं मॉल में काम कर रहे दूसरे मजदूरों को भी हेलमेट, जूते, सेफ्टी बेल्ट, दस्ताने वगैरह नहीं दिए गए थे। पुलिस को भी एक-डेढ़ घंटे बाद सूचना दी गई। इससे साफ है कि घटना को छिपाने की कोशिश की गई लेकिन जब बात नहीं बनी तो पुलिस को बुलाया गया।
बस नक्शा पास, हो गई विकास प्राधिकरण की ड्यूटी
घटना में जितनी लापरवाही मॉल स्वामियों की है इससे ज्यादा लापरवाही जिला विकास प्राधिकरण की सामने आई है। नियमानुसार विकास प्राधिकरण के सचिव से लेकर अवर अभियंता को समय समय पर निर्माण का निरीक्षण, मजदूरों को दिए जाने वाले उपकरण जैसे हेलमेट, दस्ताने, जूते, सेफ्टी बेल्ट, भारी भरकम सामान रखने पर सुरक्षा के मानकों की जांच करनी चाहिए। जो कि नहीं की गई। बस नक्शा पास करा लिया ड्यूटी पूरी हो गई। अब मजदूर मरे या जिए प्राधिकरण का कोई लेना देना नहीं है।